नई दिल्ली। राज्यसभा में सोमवार दोपहर एक बजे से चुनाव सुधारों को लेकर चर्चा शुरू हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर आरोप–प्रत्यारोप देखने को मिले। चर्चा के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची, ईवीएम, एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और बैलेट पेपर जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे।
चुनाव आयोग के हर कदम पर भरोसा: डॉ. एम. थंबीदुरै
चर्चा की शुरुआत करते हुए एआईएडीएमके सांसद डॉ. एम. थंबीदुरै ने कहा कि उनकी पार्टी को चुनाव आयोग के हर कदम पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और सटीक मतदाता सूची लोकतंत्र को मजबूत करती है और पारदर्शिता मतदाताओं को सशक्त बनाती है। उन्होंने करूर की घटना का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने राजनीतिक दलों के लिए अब तक कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) नहीं बनाई है।
राधाकृष्णन ने राज्य के मुद्दे न उठाने की नसीहत दी
इस पर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने राज्य के मुद्दे न उठाने की नसीहत दी, जिस पर थंबीदुरै ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रचार भी चुनाव सुधारों का ही हिस्सा है।नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद गुरविंदर सिंह ओबेरॉय ने कहा कि सहमति के बिना लोकतंत्र संभव नहीं है और प्रतिनिधित्व के बिना किसी भी व्यवस्था की वैधता नहीं हो सकती। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से चुनौती देती रहेगी।
राहुल के सवाल का गृहमंत्री ने नहीं दिया जवाब : दिग्विजय सिंह
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब अब तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि या तो चुनाव आयोग गृह मंत्री को गुमराह कर रहा है या गृह मंत्री जनता को गुमराह कर रहे हैं। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार हंगामा हुआ।आम आदमी पार्टी के सांसद संदीप कुमार पाठक ने कहा कि मौजूदा राजनीति में समान अवसर खत्म हो चुके हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों की फंडिंग में सुधार की मांग की और ईवीएम तथा एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
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बैलेट पेपर से चुनाव कराने में दिक्कत क्या
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार से सवाल किया कि अगर जनता भाजपा के साथ है तो बैलेट पेपर से चुनाव कराने में दिक्कत क्या है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र की आत्मा है और उसकी पारदर्शिता बेहद जरूरी है। वहीं, विपक्ष पर पलटवार करते हुए झारखंड भाजपा नेता दीपक राकेश ने कहा कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर भारत में चुनावी धोखाधड़ी के पहले शिकार थे। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक लाभ के लिए एसआईआर का विरोध कर रही है और फर्जी मतदाताओं को बचाना चाहती है।
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विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि 1954 के भंडारा उपचुनाव में डॉ. आंबेडकर की हार के बाद दलित समाज आहत हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्वयं संविधान निर्माता ने चुनावी धांधलियों के आरोप लगाए थे, तब विपक्ष आज चुनाव आयोग पर सवाल क्यों खड़े कर रहा है।चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि 21वीं सदी में लोकतंत्र को गोली से ज्यादा खतरा बैलेट से है।
हंगामेदार बहस के बाद राज्यसभा स्थगित
उन्होंने चुनाव आयोग से पूछा कि आधार कार्ड को मतदाता पहचान के रूप में अस्वीकार क्यों किया गया और एसआईआर के तहत हटाए गए नामों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि अपर्याप्त प्रशिक्षण के कारण बीएलओ पर दबाव बढ़ा है और इसी वजह से अब तक 40 बीएलओ आत्महत्या कर चुके हैं।हंगामेदार बहस के बाद राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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