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सवर्ण संगठनों ने जंतर-मंतर पर दोबारा अनिश्चितकालीन प्रदर्शन का किया ऐलान, आरक्षण और UGC नियमों के खिलाफ आंदोलन की तैयारी

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सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल, न्यायालय के माध्यम से प्रदर्शन की अनुमति लेने की बात कही

लखनऊ। आरक्षण व्यवस्था में सुधार, UGC के 2026 के नियमों को वापस लेने और SC/ST एक्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण संगठनों का आंदोलन अब आगे बढ़ने की तैयारी में है। 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने संगठन के कार्यकर्ताओं और सवर्ण समाज के लोगों के साथ बैठक कर आगामी रणनीति पर चर्चा की। बैठक में उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई लोगों को हिरासत में लिया।

UGC Rollback और आरक्षण सुधार को लेकर 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा पहले से की गई थी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध पोस्ट और वीडियो में भी इस आंदोलन को Reservation Reform, UGC Rollback और SC/ST Act Reform से जुड़े मुद्दों से जोड़कर प्रचारित किया गया था।

अनुमति को लेकर बना रहा असमंजस

सूरज प्रसाद चौबे के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए पहले जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं दिए जाने की बात सामने आई और बाद में रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति की चर्चा हुई। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग के लोग दिल्ली पहुंच गए और स्थिति ऐसी बनी कि दिल्ली के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित हुआ। इसके बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने की बात कही गई।

आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट में भी 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लोगों से दिल्ली पहुंचने की अपील की गई थी।

रात में पुलिस कार्रवाई का आरोप

सूरज प्रसाद चौबे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान रात करीब आठ बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। उनके मुताबिक, इस दौरान कई छात्र-छात्राओं के साथ कथित तौर पर बर्बर व्यवहार किया गया और पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों ने दावा किया कि RHA संयोजक ठाकुर शिवम सिंह भी पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए। उनके अनुसार शिवम सिंह पुलिस के लाठीचार्ज में घायल होकर गिर गए। इसके अलावा ठाकुर शिवम सिंह, मनोज मिश्रा, रविन्द्र सिंह और विकास दुबे को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया गया है।

इन दावों पर दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

पंकज कुमार धारियां के घायल होने का दावा

सवर्ण संगठनों की ओर से राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज कुमार धारियां को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। चौबे के अनुसार, पुलिस ने धारियां के साथ मारपीट की, जिसके बाद उनका एक हाथ फ्रैक्चर हो गया। आरोप है कि उन्हें बस से बाहर फेंका गया, जिससे उन्हें अन्य चोटें भी आईं।

संगठन की ओर से बताया गया कि घायल पंकज कुमार धारियां को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दावे की चिकित्सकीय या पुलिस रिकॉर्ड से स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।

पुलिस पर लगाया दोहरे मापदंड का आरोप

सूरज प्रसाद चौबे ने पुलिस और सरकार पर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर अलग-अलग व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि दूसरे समूहों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस का रवैया अलग रहा, जबकि सामान्य वर्ग से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई।

हालांकि, चौबे द्वारा जिन दूसरे प्रदर्शनों का उदाहरण दिया गया है, उनके संबंध में लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। खबर में इन आरोपों को संगठन के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक संरक्षण और वोट बैंक का भी आरोप

बैठक में सूरज प्रसाद चौबे ने आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग के लोगों के साथ कथित भेदभाव कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि राजनीतिक कारणों से जुड़ी हुई प्रक्रिया है। उन्होंने इसे वोट बैंक की राजनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि सामान्य वर्ग के हितों और अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थी और युवा अपने संवैधानिक अधिकारों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं और आंदोलन को अब और व्यापक स्तर पर ले जाने की तैयारी की जा रही है।

अजित भारती के खिलाफ FIR का भी उठाया मुद्दा

बैठक के दौरान पत्रकार अजित भारती के खिलाफ दिल्ली में दर्ज FIR का मुद्दा भी उठाया गया। चौबे ने दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद की पार्टी से जुड़े लोगों की शिकायत पर उनके खिलाफ SC/ST Act के तहत मामला दर्ज कराया गया और दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की।

इस मामले में FIR की धाराओं और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड या संबंधित पक्षों का विस्तृत बयान आवश्यक है। इसलिए इस खबर में इसे चौबे द्वारा बैठक में किए गए दावे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

न्यायालय का रुख अपनाने की तैयारी

सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि विभिन्न सवर्ण संगठनों के बीच बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार किया गया है। संगठनों ने कथित तौर पर निर्णय लिया है कि जंतर-मंतर पर दोबारा धरना-प्रदर्शन के लिए न्यायालय का रास्ता अपनाया जाएगा।

चौबे के अनुसार, न्यायालय के माध्यम से अनुमति प्राप्त करने के बाद जंतर-मंतर पर फिर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की योजना है। प्रदर्शन की तारीख सभी सवर्ण संगठनों की संयुक्त बैठक के बाद घोषित की जाएगी।

आरक्षण, SC/ST Act और UGC नियमों को लेकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान

संगठन की ओर से कहा गया है कि आंदोलन का उद्देश्य जातिगत आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव, SC/ST Act में सुधार तथा UGC Regulations 2026 को समाप्त या वापस कराने की मांग को आगे बढ़ाना है।

UGC Equity Regulations 2026 को लेकर देश में पहले भी छात्र आंदोलनों और राजनीतिक बहस का दौर रहा है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, केंद्र सरकार ने 20 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह 2026 के UGC Equity Regulations पर पुनर्विचार कर रही है।

आगे क्या?

21 अगस्त के प्रदर्शन के बाद सवर्ण संगठनों की ओर से आंदोलन को समाप्त करने के बजाय उसे नए चरण में ले जाने का संकेत दिया गया है। संगठनों की योजना न्यायालय के माध्यम से प्रदर्शन की अनुमति हासिल करने और इसके बाद अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की है।

हालांकि, प्रदर्शन की अगली तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। संगठन की संयुक्त बैठक के बाद तारीख और कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा किए जाने की बात कही गई है।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल 21 अगस्त के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, हिरासत में लिए गए लोगों और कथित रूप से घायल प्रदर्शनकारियों को लेकर सामने आ रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि का है। दिल्ली पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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