बढ़ती बिजली मांग के मद्देनजर सोलर, हाइब्रिड और एनर्जी स्टोरेज परियोजनाएं राज्य विद्युत उत्पादन निगम को प्राथमिकता से देने की मांग
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि प्रदेश में लगातार बढ़ रही विद्युत मांग और देश के ऊर्जा क्षेत्र के तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ने को देखते हुए उत्तर प्रदेश को अभी से दीर्घकालीन ऊर्जा रणनीति तैयार करनी होगी। प्रदेश की बढ़ती बिजली आवश्यकता को देखते हुए आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति करने वाले राज्यों में अग्रणी है। इसका सीधा अर्थ है कि प्रदेश की विद्युत मांग और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता भी बहुत बड़ी है। ऐसे में यदि प्रदेश को भविष्य में पर्याप्त, विश्वसनीय और पर्यावरण-अनुकूल बिजली उपलब्ध करानी है तो रिन्यूएबल एनर्जी की नई परियोजनाओं का सरकारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास उत्तर प्रदेश में ही किया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि उत्तर प्रदेश में स्थापित की जाने वाली नई बड़े पैमाने की सोलर, हाइब्रिड तथा एनर्जी स्टोरेज आधारित रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएं।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा केवल एक व्यावसायिक वस्तु नहीं बल्कि प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा का आधार है। इसलिए भविष्य की रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन क्षमता पर राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूत और प्रभावी भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि यदि रिन्यूएबल एनर्जी की बड़ी परियोजनाएं उत्पादन निगम के माध्यम से विकसित होती हैं तो प्रदेश में निर्मित होने वाली महत्वपूर्ण ऊर्जा परिसंपत्तियों पर उत्तर प्रदेश सरकार का प्रभावी नियंत्रण बना रहेगा। इससे भविष्य में बिजली की उपलब्धता, उत्पादन योजना और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय प्रदेश के हितों के अनुरूप लिए जा सकेंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को केवल बिजली उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें बैटरी स्टोरेज और पम्पड स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाना चाहिए। इससे ग्रीन एनर्जी की अनियमित उपलब्धता को संतुलित करने तथा आवश्यकता के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और पीक ऑवर में मांग का दबाव सबसे अधिक रहता है। यदि प्रदेश के पास अपनी पर्याप्त रिन्यूएबल एनर्जी तथा एनर्जी स्टोरेज क्षमता होगी तो पीक और नॉन-पीक आवर के बीच बिजली की उपलब्धता का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।
इससे महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता कम करने, ग्रिड को संतुलित रखने तथा उपभोक्ताओं को विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि उत्पादन निगम को भविष्य की ग्रीन एनर्जी जेनरेशन का प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का संस्थान बनाया जाए और इसके लिए दीर्घकालीन योजना तैयार किया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश को केवल देश का सबसे बड़ा बिजली आपूर्ति करने वाला राज्य ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के माध्यम से ग्रीन एनर्जी उत्पादन में भी देश का अग्रणी राज्य बनना चाहिए।
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