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चीन जा रहे हैं अजीत डोभाल, जानें क्यों अहम है NSA का बीजिंग दौरा?

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नई दिल्ली । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन जा रहे हैं। अजीत डोभाल आज बिजिंग के लिए रवाना हो चुके हैं। वे मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस हाईलेवल मीटिंग का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता बहाल करने और दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने पर रहेगा।

2003 में शुरू हुई थी ये वार्ता

मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर ‘विशेष प्रतिनिधियों’ (SR) की वार्ता के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे। डोभाल और वांग ‘विशेष प्रतिनिधियों’ के तौर पर काम करते हैं। यह व्यवस्था 2003 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा के विवाद को सुलझाना था।

गलवान झड़प के बाद पांच साल बंद रही वार्ता

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनावपूर्ण हालात के कारण यह बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से शुरू हुई, जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद 24वां दौर पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में हुआ था।

एजेंडा में क्या-क्या हो सकता है

उम्मीद है कि दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट (सेना पीछे हटाने के) समझौते का जायजा लेंगे। क्या पिछली बातचीत के बाद से ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ (LAC) पर शांति बनी हुई है? बीजिंग का कहना है कि बॉर्डर पर हालात “आमतौर पर स्थिर” हैं, दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि 24वें दौर की बातचीत के बाद से वे समझौते पर अमल करने और अगली बैठक की तैयारी में जुटे रहे हैं

बेहद अहम है डोबाल का ये दौरा

यह बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक सकारात्मक माहौल बनाना और सीमा पर तनाव कम करना है। इनमें सीमा प्रबंधन, आपसी भरोसा बढ़ाने वाले उपाय और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। हालांकि, बीजिंग और नई दिल्ली ने चीनी राष्ट्रपति शी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि वह आएंगे। उनके दौरे से समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का रास्ता बन सकता है।

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