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26 घंटे के छापे में खुला ‘कुबेर का खजाना’! रिटायर्ड एआरटीओ के घर से 20 करोड़ का सोना-चांदी, ₹1.62 करोड़ कैश बरामद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर 26 घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोना-चांदी, हीरे के आभूषण, करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियों के दस्तावेज और विभिन्न निवेशों से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए गए। विजिलेंस की इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

26 घंटे तक चली तलाशी, घर से मिला करोड़ों का खजाना

विजिलेंस की टीम ने ललित कुमार के आवास की करीब 26 घंटे तक बारीकी से तलाशी ली। जांच के दौरान घर के अलग-अलग हिस्सों में कई लॉकर मिले, जिनमें सोने-चांदी के बिस्किट, कीमती आभूषण और भारी मात्रा में नकदी रखी हुई थी। अधिकारियों को घर में अलग-अलग पैकेटों में छिपाकर रखे गए 1.62 करोड़ रुपये नकद भी बरामद हुए।

13 किलो सोना, 9 किलो चांदी और हीरे के आभूषण

तलाशी में 13 किलोग्राम सोना, 9 किलोग्राम चांदी, सोने-चांदी के बिस्किट तथा हीरे के कीमती आभूषण बरामद किए गए। सरकार से मान्यता प्राप्त वैल्यूअर से इनकी कीमत का आकलन कराया गया, जिसमें बरामद आभूषणों और कीमती धातुओं का मूल्य 20 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।

13 करोड़ से अधिक की संपत्तियों के दस्तावेज मिले

विजिलेंस को जांच के दौरान विभिन्न स्थानों पर निवेश और अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल कर रही है ताकि संपत्तियों के वास्तविक स्रोत और स्वामित्व की पुष्टि की जा सके।

बैंक निवेश, गाड़ियां और हथियार भी मिले

तलाशी के दौरान अधिकारियों को टोयोटा इनोवा और हुंडई आई-20 कार के अलावा एक रिवॉल्वर भी मिली। इसके साथ ही विभिन्न बैंकों, डाकघर, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में एक करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के प्रमाण भी बरामद हुए। जांच में यह भी सामने आया कि आवास की साज-सज्जा, फर्नीचर और घरेलू उपकरणों पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे।

आय से 73.6 प्रतिशत अधिक खर्च का आरोप

विजिलेंस के अनुसार, जांच में ललित कुमार की वैध आय 93.26 लाख रुपये आंकी गई, जबकि चल-अचल संपत्तियों और अन्य मदों पर उनका कुल खर्च 1.61 करोड़ रुपये पाया गया। यानी उन्होंने अपनी घोषित आय से 68.66 लाख रुपये (करीब 73.6 प्रतिशत) अधिक खर्च किया। इस अतिरिक्त संपत्ति और खर्च का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

रायबरेली से भी जुड़ा है ललित कुमार का संबंध

ललित कुमार मूल रूप से रायबरेली के नूर मार्केट, मिलन सिनेमा गली के निवासी हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायबरेली के जीआईसी से प्राप्त की थी। वर्ष 2010-11 में वह रायबरेली एआरटीओ कार्यालय में क्षेत्रीय निरीक्षक (आरआई) के पद पर करीब डेढ़ वर्ष तक तैनात रहे। इससे पहले वह रोडवेज विभाग में फोरमैन के पद पर कार्यरत थे।

तीन महीने पहले रायबरेली पहुंचे थे

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब तीन माह पहले ललित कुमार रायबरेली आए थे। उन्होंने अपने पैतृक मकान में किरायेदारों से कब्जा वापस लिया था। मकान में बनी तीन दुकानों में से एक को लेकर किरायेदार संतोष चौधरी के साथ विवाद हुआ था, जो अदालत तक पहुंचा। कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने संबंधित दुकान का कब्जा अपने पास ले लिया था।

जांच जारी

विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि बरामद नकदी, आभूषण, निवेश और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। फिलहाल आय से अधिक संपत्ति के मामले में ललित कुमार के खिलाफ जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

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