प्रयागराज । प्राचीन धार्मिक एवं न्यायिक अधिकारों की रक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उच्च न्यायालय, इलाहाबाद (Allahabad High Court) में दायर अवमानना याचिका पर 6 मई 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई है। यह सुनवाई कोर्ट नंबर 9 में होगी।
संबंधित पक्षों द्वारा जानबूझकर पालन नहीं किया
इस प्रकरण में वादी आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा Contempt Application (Civil) No. 2817/2026 प्रस्तुत की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय द्वारा पारित आदेश 27.02.2026 एवं 25.03.2026 का संबंधित पक्षों द्वारा जानबूझकर पालन नहीं किया गया, जो न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
किन पर लगे हैं आरोप
याचिका में जिन प्रमुख प्रतिवादियों को नामित किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से—
स्वयंभू/कथित शंकराचार्य Avimukteshwaranand Saraswati
मुकुंदानंद ब्रह्मचारी Mukundanand Brahmachari
अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारी (उत्तर प्रदेश शासन एवं मंडलायुक्त स्तर तक) शामिल बताए गए हैं।
याचिका में क्या कहा गया है
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि प्रतिवादीगण द्वारा न केवल न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की गई है, बल्कि उनके कृत्य “न्याय प्रशासन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप (Direct Interference with Administration of Justice)” की श्रेणी में आते हैं।याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह स्थिति अवमानना न्यायालय अधिनियम, 1971 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती है, इसलिए कठोर दंडात्मक कार्रवाई आवश्यक है ताकि न्यायालय की गरिमा और आदेशों की प्रभावशीलता बनी रहे।
वादी पक्ष का बयान
वादी श्री आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कहा—“यह मामला केवल किसी व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि न्यायालय की मर्यादा और सनातन परंपराओं की रक्षा का विषय है। न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।”उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला प्रदेश में विधि व्यवस्था और न्यायिक आदेशों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकता है।
प्रशासनिक और कानूनी दृष्टिकोण
सूत्रों के अनुसार, यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें धार्मिक संस्थाओं, प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़े प्रश्न शामिल हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला अवमानना कानून के तहत गंभीर परिणामों की ओर बढ़ सकता है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें 6 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां न्यायालय यह तय करेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या प्रतिवादियों के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी या नहीं।जारीकर्ता श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट।
