मेरठ । यूपी में मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार का दिन सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रहा, बल्कि हजारों परिवारों के लिए जीवन बदल देने वाला दर्द बन गया। जहां कभी रौनक, खरीदारी और रोजगार की चहल-पहल हुआ करती थी, वहां आज ताले, सन्नाटा और आंसू रह गए।

प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बड़ी कार्रवाई की

करीब चार दशक से बसे इस बाजार पर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया। सुबह 9 बजे शुरू हुआ यह अभियान शाम 6 बजे तक चलता रहा और इस दौरान पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील रहा।

“जहां सपने पलते थे, वहां अब ताले लग गए”

सेंट्रल मार्केट सिर्फ दुकानें नहीं था, यह हजारों परिवारों की आजीविका का सहारा था। कोई यहां 30 साल से फर्नीचर चला रहा था, कोई 20 साल से पूजा सामग्री बेच रहा था, तो कोई अस्पताल और क्लीनिक से लोगों की जिंदगी बचा रहा था।लेकिन बुधवार को वही दुकानें एक-एक कर सील होती गईं और उनके साथ लोगों की उम्मीदें भी बंद हो गईं।

आंसुओं और बेबसी के बीच चली कार्रवाई

सीलिंग के दौरान कई जगहों पर दुकानदार अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ते, गिड़गिड़ाते नजर आए।कई महिलाओं की आंखें नम थीं, कई कर्मचारी रोते हुए अपनी रोजी-रोटी बचाने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन कार्रवाई नहीं रुकी।“हमने जिंदगी भर की कमाई यहां लगा दी, अब हम कहां जाएं…” यह सवाल हर चेहरे पर लिखा दिखा, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं था।

अस्पताल, स्कूल और दुकानें सब एक साथ बंद

इस अभियान में केवल दुकानें ही नहीं, बल्कि अस्पताल, कोचिंग सेंटर, स्कूल, रेस्टोरेंट और कॉम्प्लेक्स भी सील कर दिए गए।जहां कभी इलाज होता था, वहां अब ताले लटक रहे हैं; जहां बच्चे पढ़ते थे, वहां अब सन्नाटा है।करीब 40 हजार लोगों की आजीविका इस कार्रवाई से सीधे प्रभावित होने की बात सामने आई है।

भारी पुलिस बल और सात टीमों की कार्रवाई

सुबह से ही पूरे इलाके में पुलिस तैनात कर दी गई थी। सात अलग-अलग टीमों ने एक साथ कार्रवाई शुरू की और कुछ ही घंटों में पूरा मार्केट बदल गया।कई जगह बैरिकेडिंग लगाकर लोगों की आवाजाही रोक दी गई ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

“कोर्ट के आदेश पर मजबूरी में कार्रवाई”

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है और नियमों के उल्लंघन को लेकर यह कदम जरूरी था।लेकिन जमीन पर सच यह था कि आदेश और जिंदगी के बीच खड़े लोग टूटते जा रहे थे।

“अब आगे क्या करेंगे हम?”

दुकानदारों की आंखों में सिर्फ एक सवाल था—अब आगे क्या?

कोई 25 साल से दुकान चला रहा था

कोई कर्ज लेकर व्यापार खड़ा किया था

कोई परिवार की पूरी जिम्मेदारी इसी दुकान पर टिका कर बैठा था लेकिन अब सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया।

टूटे सपनों की तस्वीर

जहां पहले ग्राहकों की भीड़ रहती थी, वहां अब बंद शटर और सन्नाटा है।जहां रोजी-रोटी चलती थी, वहां अब बेरोजगारी की चिंता खड़ी है।मेरठ के सेंट्रल मार्केट की यह कार्रवाई सिर्फ सीलिंग नहीं, बल्कि हजारों सपनों, वर्षों की मेहनत और परिवारों की उम्मीदों के बंद होने की कहानी बन गई है।

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