मेरठ। इंचौली थाना क्षेत्र के जलालपुर गांव में मातम पसरा है… हर गली में सन्नाटा है… और हर घर से सिर्फ रोने की आवाजें आ रही हैं। एक ही परिवार के चार-चार चिराग एक साथ बुझ जाने की खबर ने पूरे गांव को अंदर तक तोड़ दिया है।
100 वर्षीय दादी भगवती देवी को अंतिम विदाई देने गए थे
शुक्रवार का दिन था… परिवार अपनी 100 वर्षीय दादी भगवती देवी को अंतिम विदाई देने हस्तिनापुर के मखदूमपुर गंगा घाट पहुंचा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर सिर्फ दादी की विदाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चार होनहार बेटों के लिए भी आखिरी सफर बन जाएगा।
अंतिम संस्कार के बाद गंगा में उतरे नहाने
अंतिम संस्कार के बाद माहौल कुछ हल्का करने के लिए चारों चचेरे भाई—अभिषेक (21), हिमांशु (17), दीपांशु (17) और प्रियांशु (15)—अपने एक रिश्तेदार प्रदीप के साथ गंगा स्नान के लिए उतर गए। गंगा किनारे हंसी-ठिठोली चल रही थी… लेकिन कुछ ही पलों में यह खुशियां चीख-पुकार में बदल गईं।
अचानक चारों युवक गहरे पानी में चले गए
अचानक चारों युवक गहरे पानी में चले गए। लहरें तेज थीं… किसी को संभलने का मौका नहीं मिला… और देखते ही देखते चारों गंगा की गोद में समा गए। आसपास मौजूद लोगों ने जान बचाने की कोशिश की, लेकिन वे चारों आंखों के सामने ओझल हो गए।किसी तरह प्रदीप को बचा लिया गया, लेकिन बाकी चारों का कोई सुराग नहीं लग सका।
गंगा मैया… मेरे बच्चों को लौटा दो
जब यह खबर गांव पहुंची, तो जैसे आसमान टूट पड़ा।मां बिजेंद्री अपने बेटों के कपड़ों को सीने से लगाकर बार-बार बेहोश हो रही हैं…मुनेश अपने दोनों बेटों को पुकारते हुए गंगा से गुहार लगा रही हैं— “गंगा मैया… मेरे बच्चों को लौटा दो…”वह मंजर किसी के भी दिल को चीर देने वाला है।जिस घर में कभी हंसी गूंजती थी, आज वहां सन्नाटा है…
जहां सपने थे, वहां अब सिर्फ आंसू हैं…
पिता गंगा किनारे बैठकर बार-बार एक ही बात कह रहे हैं—अब मेरा सब कुछ खत्म हो गया…”चारों बच्चे पढ़ाई में होनहार थे… परिवार की उम्मीद थे…लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।घटना की सूचना मिलते ही अविनाश पांडेय समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे।
देर रात तक चारों का कोई पता नहीं चल सका
रात भर सर्च ऑपरेशन चलता रहा… अंधेरे को चीरने के लिए हाईमास्ट लाइटें लगाई गईं… गोताखोर पानी में उतरते रहे… लेकिन देर रात तक चारों का कोई पता नहीं चल सका।दादी को अंतिम विदाई देने गए थे… लेकिन घर के चार बेटे खुद ही गंगा की लहरों में खो गए…यह हादसा सिर्फ एक परिवार नहीं, पूरे गांव की आत्मा को झकझोर गया है।
