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स्मार्ट मीटर पर CM के फैसले का स्वागत, वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की समीक्षा को भी बने विशेषज्ञ समिति की मांग

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लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पावर सेक्टर की समीक्षा के बाद स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्णय का स्वागत किया है। साथ ही समिति ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था की समीक्षा के लिए भी अलग से विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग उठाई है।

कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा

संघर्ष समिति का कहना है कि जिस तरह स्मार्ट मीटर और प्रीपेड स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, उसी तरह वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था भी आम उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गई है।

सिंगल विंडो सिस्टम खत्म होने से बढ़ी परेशानी

समिति ने बताया कि पहले विद्युत वितरण व्यवस्था में एसडीओ और अधिशासी अभियंता के स्तर पर ही उपभोक्ताओं की अधिकांश समस्याओं का समाधान हो जाता था। यह एक तरह की सिंगल विंडो प्रणाली थी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती थी।लेकिन वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू होने के बाद 33 केवी, 11 केवी लाइन, मीटरिंग, बिलिंग और मेंटेनेंस जैसे कार्य अलग-अलग अधिकारियों में बांट दिए गए हैं। इससे उपभोक्ताओं को अपनी समस्या के समाधान के लिए कई जगह भटकना पड़ रहा है।

उपभोक्ता हित में समीक्षा जरूरी

संघर्ष समिति ने मांग की कि इस व्यवस्था के दुष्प्रभावों का गहन अध्ययन कर इसे सुधारने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई जाए, ताकि उपभोक्ता हितैषी व्यवस्था दोबारा लागू हो सके।

कार्य वातावरण सुधारने की भी मांग

समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा डिस्कॉम के प्रदर्शन में सुधार और राष्ट्रीय स्तर पर रेटिंग बेहतर होने की सराहना की गई है, लेकिन इस क्रम को आगे बढ़ाने के लिए कार्य वातावरण को सकारात्मक बनाना जरूरी है।

समिति ने आरोप लगाया कि नवंबर 2024 में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की घोषणा और उसके विरोध में आंदोलन कर रहे कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई से माहौल प्रभावित हुआ है।

निजीकरण वापस लेने की मांग

संघर्ष समिति ने सरकार से निजीकरण का निर्णय वापस लेने और कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई को समाप्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे कार्य क्षमता और रेटिंग दोनों में सुधार होगा।

उत्पादन और ट्रांसमिशन का उदाहरण

समिति ने दावा किया कि जहां निजीकरण का दबाव नहीं है, जैसे उत्पादन निगम और ट्रांसको, वहां बेहतर परिणाम सामने आए हैं। उत्पादन निगम करीब 3143 करोड़ रुपये के मुनाफे में है और ट्रांसको भी लाभ में कार्य कर रहा है।