रामपुर, शाहबाद । कभी अपने मोहल्ले के छोटे से प्राथमिक विद्यालय की खिड़कियों से सपने देखते हुए, आज गुलफिजा पूरे शाहबाद और परिवार के लिए प्रेरणा बन गई हैं। मंजू खां की बेटी गुलफिजा ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 535वीं रैंक हासिल कर अपनी लगन और मेहनत का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसे सुनकर हर युवा कह उठेगा – अगर हौंसला और मेहनत हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
पिता किसानी करते थे और घर की आर्थिक स्थिति सामान्य थी
गुलफिजा का सफर आसान नहीं था। उनका परिवार साधारण था, पिता किसानी करते थे और घर की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। लेकिन गुलफिजा का सपना बड़ा था – देश की सेवा करना। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा शाहबाद के पटवाई स्कूल से की, और आठवीं तक की पढ़ाई शहर के जीजीआईसी से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए नैनीताल और फिर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की।
चार प्रयासों में असफल रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी
दिल्ली में प्राइवेट सेक्टर की नौकरी करने के बाद कोविड के दौरान गुलफिजा अपने घर लौट आईं। यह समय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। घर पर रहकर उन्होंने पूरी लगन के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की।उनकी मेहनत में लगन का ऐसा जज्बा था कि पिछले चार प्रयासों में असफल रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। चौथे प्रयास में प्री और मेंस परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू तक पहुँचकर रह गईं, लेकिन पांचवे प्रयास में सफलता ने उनके और उनके परिवार के सपनों को सच कर दिया।
लगातार प्रयास – यही हैं सफलता की असली कुंजी
गुलफिजा की कहानी यह सिखाती है कि संसाधनों की कमी कभी भी मेहनत और हौसले को रोक नहीं सकती। परिवार का समर्थन, खुद पर भरोसा और लगातार प्रयास – यही हैं सफलता की असली कुंजी। आज गुलफिजा सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं, पूरे शाहबाद और समाज के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं।
