बाराबंकी। यूपी के बाराबंकी के रामसनेहीघाट क्षेत्र के ढेमा गांव में पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों के बीच 25 साल के युवक सुहेल की मौत ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। डेढ़ महीने तक अस्पताल में जिंदगी से जंग लड़ने के बाद आखिरकार सुहेल ने दम तोड़ दिया — और पीछे छोड़ गया सैकड़ों सवाल।
घर से उठाया… फिर शुरू हुआ ‘टॉर्चर’!
परिजनों का आरोप है कि फरवरी में पुलिस सुहेल को घर से उठा ले गई और उसे अयोध्या पुलिस के हवाले कर दिया गया। इसके बाद पटरंगा थाना और बसौढ़ी मथुरा चौकी में उसे कथित ‘थर्ड डिग्री’ दी गई।
“पैसे लाओ या जान दे दो” — खौफनाक आरोप
परिवार का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने 2 लाख रुपये की मांग की और धमकी दी— “पैसे लाओ या फंदे पर लटक जाओ!”
यही नहीं, आरोप है कि सुहेल को बेरहमी से पीटा गया और मानसिक रूप से तोड़ा गया।
टूटा हौसला… उठा लिया खौफनाक कदम
लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर सुहेल ने 12 फरवरी को आत्महत्या की कोशिश कर ली। तब से वह लखनऊ के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।बुधवार रात सुहेल की मौत होते ही गांव में गुस्सा फूट पड़ा। भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया गया।
मासूम बेटी का उजड़ गया संसार
पहले मां… अब पिता… सुहेल की छोटी बेटी पूरी तरह अनाथ हो गई। गांव में हर आंख नम है, लेकिन गुस्सा भी उतना ही है।सबसे बड़ा आरोप — न्याय मांगने पर परिजनों और समर्थकों पर ही मुकदमे दर्ज कर दिए गए, जबकि आरोपित पुलिसकर्मी अब भी कार्रवाई से बाहर!
सिस्टम पर बड़ा सवाल
बिना सबूत के हिरासत क्यों?
एक जिले से दूसरे जिले पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया क्या थी?
आरोपों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
सनसनीखेज सवाल
क्या ‘वर्दी’ के नाम पर यह अत्याचार दबा दिया जाएगा?
या सुहेल की मौत बनेगी इंसाफ की शुरुआत?
बाराबंकी से अयोध्या तक पुलिस महकमे में मचा हड़कंप, जवाबदेही की मांग तेज!
