एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।  इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को लेकर पावर सेक्टर में विरोध तेज हो गया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने संसद की ऊर्जा मामलों की स्टैंडिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित नए ड्राफ्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली क्षेत्र के निजीकरण के उद्देश्य से इस संशोधन बिल को जल्दबाजी में संसद से पारित कराने की कोशिश की गई तो देशभर के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।

31 मार्च 2026 तक का समय देने की भी मांग की

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने केंद्रीय विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल को पत्र भेजकर मांग की है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर स्टेकहोल्डर्स से चर्चा से पहले संसद की ऊर्जा मामलों की स्टैंडिंग कमेटी द्वारा सुझाए गए नए ड्राफ्ट की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उन्होंने स्टैंडिंग कमेटी के माननीय सदस्यों की सूची सार्वजनिक करने और नए ड्राफ्ट पर कमेंट देने के लिए कम से कम 31 मार्च 2026 तक का समय देने की भी मांग की है।

बिजली मंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहे केंद्रीय विद्युत मंत्री

फेडरेशन के अनुसार, संसद की ऊर्जा मामलों की स्टैंडिंग कमेटी ने 9 अक्टूबर 2025 को विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर अपनी टिप्पणी देते हुए एक नया ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। इसी प्रस्तावित ड्राफ्ट के आधार पर केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर आगामी 22 और 23 जनवरी को देशभर के राज्यों के बिजली मंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं।शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि इस बैठक का मुख्य एजेंडा स्टैंडिंग कमेटी द्वारा सुझाए गए ड्राफ्ट के अनुरूप इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर आम सहमति बनाना है। साथ ही बिजली के निजीकरण, फ्रेंचाइजी मॉडल और निजीकरण के लिए सशर्त वित्तीय पैकेज जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि बजट सत्र में इस बिल को संसद से पारित कराया जा सके।

किसी भी स्थिति में पावर सेक्टर का निजीकरण स्वीकार नहीं

फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों को किसी भी स्थिति में पावर सेक्टर का निजीकरण स्वीकार नहीं है। संगठन का कहना है कि यह बेहद चिंताजनक है कि एक ओर विद्युत मंत्रालय स्टेकहोल्डर्स से पुराने मसौदे पर चर्चा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के बिजली मंत्रियों से स्टैंडिंग कमेटी द्वारा सुझाए गए नए ड्राफ्ट पर बातचीत की जा रही है, जबकि यह नया ड्राफ्ट सार्वजनिक ही नहीं किया गया है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब नया ड्राफ्ट ही सार्वजनिक नहीं किया गया है, तो उस पर आम सहमति कैसे बनाई जा सकती है। फेडरेशन ने इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।

निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार 410वें दिन भी जारी

शैलेन्द्र दुबे ने यह भी कहा कि 12 जनवरी को केंद्रीय विद्युत सचिव के साथ होने वाली वार्ता के बाद नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की कोर कमेटी निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में संघर्ष की आगे की रणनीति का ऐलान करेगी।उधर, उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार 410वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस अवसर पर अवकाश के दिन भी बिजली कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं, किसानों और बिजली कर्मियों के बीच व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर निजीकरण के खिलाफ जन आंदोलन को और तेज करने का प्रयास किया।

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