बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से न्याय व्यवस्था का एक बेहद कठोर और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने छह वर्षीय बच्ची के साथ अमानवीय दुष्कर्म के मामले में दोषी 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को समाज की आत्मा पर हमला करार देते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों के लिए किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।
दोषी को अंतिम सांस तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखने का आदेश
मंगलवार सुबह विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का विस्तृत निर्णय सुनाते हुए दोषी को अंतिम सांस तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखने का आदेश दिया। फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश ने कलम की निब तोड़ते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि यह अपराध “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है।
25 जुलाई 2025 को बच्ची के साथ हुई थी बर्बरता
यह दिल दहला देने वाली घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। अभियोजन के मुताबिक, आरोपी अमित रैकवार ने स्कूल से घर लौट रही मासूम बच्ची को गुटखा दिलाने का लालच दिया और उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ बर्बरता की सारी सीमाएं लांघ दीं।
बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए
मेडिकल जांच में बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए, वहीं गंभीर आंतरिक और बाहरी चोटों की पुष्टि हुई। इस जघन्य अपराध के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देर रात मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया था। तीन दिन के भीतर उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने 7 अक्टूबर 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की
मामले में कालिंजर पुलिस ने 7 अक्टूबर 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और भारतीय नवीन दंड संहिता की कई गंभीर धाराएं शामिल की गईं। 12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद नियमित सुनवाई शुरू हुई। करीब 56 दिनों तक चली सुनवाई में अदालत ने 10 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए। इनमें पीड़िता का इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम, फॉरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और बीएनएसएस की धाराओं के तहत दर्ज बयान शामिल थे। इन सभी साक्ष्यों ने आरोपी की संलिप्तता को निर्विवाद रूप से साबित कर दिया।
फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार में राहत
बचाव पक्ष ने सबूतों पर सवाल उठाने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से मासूम को शिकार बनाया और अपराध की क्रूरता इस कदर थी कि केवल मौत की सजा ही न्याय के अनुरूप है।फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार में राहत और भय दोनों के भाव दिखे। बच्ची की मां ने कहा कि असली चैन तभी मिलेगा, जब सजा पर अमल होगा। वहीं आरोपी के परिजनों की ओर से कथित धमकियों के चलते परिवार अब भी दहशत में है।यह फैसला न सिर्फ एक अपराधी को सजा है, बल्कि समाज को यह संदेश भी है कि मासूमों के खिलाफ दरिंदगी करने वालों को कानून किसी भी हाल में बख्शने वाला नहीं है।
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