एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । कानपुर देहात में कोरोना महामारी के अंधेरे दौर में मदद और रोजगार का झांसा देकर जो खेल खेला गया, उसने पुलिस को भी चौंका दिया। अकबरपुर थाना क्षेत्र के पास बंद पड़े एक स्कूल की इमारत में ऐसा खतरनाक नेटवर्क पनप रहा था, जहां सिलाई–कढ़ाई और स्किल ट्रेनिंग के नाम पर लोगों का धर्म बदला जा रहा था।
कन्नौज में धर्मांतरण गिरोह के भंडाफोड़ के बाद जब कड़ियां जुड़ीं
कन्नौज में धर्मांतरण गिरोह के भंडाफोड़ के बाद जब कड़ियां जुड़ीं, तो जांच सीधे कानपुर देहात तक पहुंच गई। एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय के निर्देश पर बनी एसआईटी ने करीब एक महीने की गुप्त जांच के बाद नवाकांती सोसाइटी का पर्दाफाश कर दिया। शनिवार को पुलिस ने गिरोह के तीन मुख्य चेहरों—डेनियल शरद सिंह, हरिओम त्यागी और सावित्री शर्मा—को दबोच लिया।
मदद का जाल, धर्मांतरण का फॉर्मूला
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह ने आर्थिक रूप से कमजोर और अनुसूचित जाति के लोगों को टारगेट किया। पहले सिलाई मशीन, हैंडपंप, पैसे और प्रशिक्षण देकर भरोसा जीता गया। फिर बाइबिल रीडिंग, प्रार्थना सभा और वेपटिस्म की प्रक्रिया से धर्म परिवर्तन कराया गया।हैरान करने वाली बात यह कि प्रार्थना सभा में आने पर 200 रुपये, प्रचार करने पर 6 से 10 हजार रुपये महीना, और नए लोगों को जोड़ने पर इनाम तक दिया जाता था—पूरी व्यवस्था किसी चेन सिस्टम की तरह चल रही थी।
विदेशी चेहरे, विदेशी पैसा?
एसआईटी के हाथ कुछ चौंकाने वाली तस्वीरें लगी हैं, जिनमें दर्जनों लोग बाइबिल पढ़ते दिख रहे हैं और कुछ चेहरे विदेशी प्रतीत हो रहे हैं। आरोप है कि संस्था को विदेश से फंडिंग हो रही थी। पुलिस अब बैंक खातों, दस्तावेजों और आंध्रप्रदेश से जुड़े पंजीकरण की गहन जांच कर रही है।
कड़ी धाराएं, लंबी सजा का खतरा
पीड़ित की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें 14 साल तक की सजा का प्रावधान है।
कई जिलों में फैला नेटवर्क
जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क सिर्फ कानपुर देहात तक सीमित नहीं, बल्कि कन्नौज, औरैया, जालौन, कानपुर नगर, फतेहपुर, झांसी और चंदौली तक फैला हो सकता है। सवाल बड़ा है—महामारी की मजबूरी में फंसे कितने लोग इस जाल में उलझे? पैसा कहां से आया? और पर्दे के पीछे कौन-से बड़े चेहरे हैं?अब सबकी नजरें एसआईटी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं…
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