एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने लोकसभा में पारित सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) बिल, 2025 के खिलाफ 23 दिसंबर 2025 को देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
यह बिल मौजूदा संरचना का कर रहा कमजोर
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE), केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्लेटफॉर्म और एसकेएम के अनुसार यह बिल भारत की न्यूक्लियर सुरक्षा और जवाबदेही की मौजूदा संरचना को कमजोर करता है तथा अत्यंत संवेदनशील ऊर्जा क्षेत्र को बड़े पैमाने पर निजी और विदेशी कंपनियों के लिए खोल देता है।
अहम हिस्से निजी ऑपरेटरों को सौंपे जा सकेंगे
पदाधिकारियों का कहना है कि मौजूदा एटॉमिक एनर्जी एक्ट नागरिक न्यूक्लियर गतिविधियों पर सख्त सार्वजनिक नियंत्रण सुनिश्चित करता था, लेकिन शांति बिल इसे लाभ-केंद्रित लाइसेंसिंग व्यवस्था में बदल देता है। इससे न्यूक्लियर वैल्यू चेन के अहम हिस्से निजी ऑपरेटरों को सौंपे जा सकेंगे, जबकि जोखिमों का बोझ जनता और राष्ट्र पर पड़ेगा।आरोप है कि सीएलएनडी (Civil Liability for Nuclear Damage) एक्ट को निरस्त कर रिएक्टर सप्लायर्स के खिलाफ ऑपरेटर के वैधानिक पुनर्भरण के अधिकार को खत्म कर दिया गया है।
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गांवों में शांति बिल के विरोध में प्रदर्शन करें
इससे दोषपूर्ण डिजाइन या उपकरण के लिए निजी निर्माताओं की जवाबदेही समाप्त हो जाएगी और किसी दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक बोझ पीड़ितों व सरकार पर आ जाएगा। संगठनों का तर्क है कि फुकुशिमा जैसी आपदाओं के उदाहरण के बावजूद अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स वर्षों से दायित्व से छूट की मांग करते रहे हैं, जिसे अब रास्ता मिल गया है।एनसीसीओईईई, सीटीयू प्लेटफॉर्म और एसकेएम ने देशभर की सभी इकाइयों से अपील की है कि 23 दिसंबर 2025 को अपने-अपने कार्यस्थलों और गांवों में शांति बिल के विरोध में प्रदर्शन करें।
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निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन 386वें दिन भी जारी रहा
साथ ही, बिजली के निजीकरण और ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 के खिलाफ संयुक्त अभियान को जनवरी–फरवरी 2026 में बड़े सम्मेलनों और रैलियों के साथ तेज करने की घोषणा की गई है।संगठनों ने शांति बिल की तत्काल वापसी, सख्त दायित्व प्रावधानों की बहाली (ऑपरेटर के पुनर्भरण अधिकार सहित), स्वतंत्र न्यूक्लियर नियामक प्राधिकरण के गठन, पर्यावरण व श्रम संरक्षणों को मजबूत करने और विदेशी भागीदारी पर स्पष्ट संसदीय नियंत्रण की मांग दोहराई है।उधर, पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय के विरोध में चल रहा आंदोलन 386वें दिन भी जारी रहा। आज प्रदेश के सभी जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए।
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