एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और यूपी एटीएस की शुरुआती पड़ताल में यह साफ होता जा रहा है कि इस घटना के तार कानपुर तक मजबूती से जुड़े हैं। जांच एजेंसियों ने बुधवार देर रात कानपुर कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के चिकित्सक डॉ. आरिफ मीर को हिरासत में लेकर उनके मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल डिवाइस खंगाले। प्रारंभिक पड़ताल में कई ऐसे डिजिटल प्रमाण मिले हैं, जिनसे डॉक्टरों के एक गुप्त नेटवर्क के सक्रिय होने का संकेत मिल रहा है।

शाहीन और आरिफ के बीच बातचीत के मिले सबूत

एजेंसियों को डॉ. आरिफ और संदिग्ध डॉ. शाहीन के बीच लगातार संपर्क के प्रमाण मिले हैं। सूत्र बताते हैं कि धमाके से कुछ घंटे पहले तक दोनों के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बातचीत हुई थी। टेलीग्राम चैट, कॉल लॉग और क्लाउड बैकअप में कई संदेश मिले हैं जो विस्फोट से पहले की गतिविधियों से मेल खाते हैं। इन्हीं आधारों पर एनआईए की टीम डॉ. आरिफ को पूछताछ के लिए दिल्ली ले गई है।

पढ़े-लिखे युवकों को ‘स्लीपर सेल’ के तौर पर तैयार कर रहे है

जांच में खुलासा हुआ है कि डॉ. आरिफ और दिल्ली धमाके में घायल डॉक्टर उमर दोनों ने कश्मीर में मेडिकल पढ़ाई की थी। हालांकि अलग-अलग संस्थानों में पढ़ने के बावजूद सोशल मीडिया और पेशेवर नेटवर्क के माध्यम से उनका संपर्क बताया जा रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि यह नेटवर्क जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवा-उल-हिंद जैसे संगठनों के मॉड्यूल के रूप में काम कर रहा था, जहां पढ़े-लिखे युवकों को ‘स्लीपर सेल’ के तौर पर तैयार किया जाता है।

तीन और डॉक्टरों से की जा रही पूछताछ

खुफिया सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन पहले भी कानपुर आ चुकी है और शहर में कई डॉक्टरों, शोधार्थियों व छात्रों से मिली थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले पांच वर्षों में मेडिकल कॉलेज, कार्डियोलॉजी और अन्य संस्थानों से जुड़े तमाम डॉक्टरों व शोधार्थियों की विस्तृत सूची तैयार की है। गुरुवार को तीन और डॉक्टरों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया, जिन्होंने टेलीग्राम चैनलों पर संदिग्ध पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी थी।

डॉ. शाहीन का भाई परवेज गिरफ्तार , कई मेडिकल संस्थान राडार पर

जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद मॉड्यूल की सदस्य डॉ. शाहीन से जुड़े नेटवर्क की जांच में नया मोड़ आया है। उनका भाई डॉ. परवेज, जो तीन दिनों से घर से लापता था, अब एजेंसियों की गिरफ्त में है। यूपी एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की मड़ियांव स्थित उसके आवास पर छापेमारी में ऐसे सुराग मिले कि सहारनपुर में डॉ. आदिल की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही वह जल्दबाजी में अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण छोड़कर भागा था। बाद में उसे दबोच लिया गया।

परवेज के कई रिश्तेदारों को पूछताछ को बुलाया

जांच एजेंसियों ने शाहीन और परवेज के कई रिश्तेदारों व परिचितों को पूछताछ के लिए बुलाया है। खुफिया विभाग यह भी जांच कर रहा है कि यूपी में कितने कश्मीरी मूल के डॉक्टर अध्ययन या नौकरी कर रहे हैं। इसी वजह से कई अल्पसंख्यक मेडिकल संस्थान अब जांच के दायरे में हैं और इनसे संबंधित विस्तृत डाटा जुटाया जा रहा है। अनुमान है कि 200 से अधिक कश्मीरी नागरिक प्रदेश में कार्यरत हैं।

किसी संदिग्ध के खिलाफ कोई ठोस सबूत अभी तक नहीं मिले

उधर, एटीएस ने परवेज को जमीन बेचने वाले इश्तियाक से गहन पूछताछ की है। वहीं जमीन रजिस्ट्री के दौरान गवाही देने वाले फैजान को भी एटीएस मुख्यालय बुलाया गया है। दूसरे गवाह की तलाश जारी है। सूत्रों के अनुसार, जांच फिलहाल डॉ. शाहीन और डॉ. परवेज के संपर्कों पर केंद्रित है। परवेज के मोबाइल में मिले कई नंबरों के आधार पर लोगों को बुलाया जा रहा है, हालांकि अब तक किसी संदिग्ध के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इसी बीच, एजेंसियां जमात-ए-इस्लामी के संभावित यूपी कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।

एटीएस ने परवेज के दफ्तर में करीब डेढ़ घंटे तक की छानबीन

दिल्ली धमाके की जांच में तेजी लाते हुए एटीएस और लखनऊ पुलिस की टीमें गुरुवार को कुर्सी रोड स्थित इंटीग्रल यूनिवर्सिटी पहुंचीं। यह कार्रवाई डॉ. शाहीन और उसके भाई डॉ. परवेज की गिरफ्तारी के बाद की गई है। अधिकारियों ने विश्वविद्यालय में डॉ. परवेज के दफ्तर की करीब डेढ़ घंटे तक छानबीन की और अनेक दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। टीम ने विश्वविद्यालय प्रशासन से उसके कामकाज, व्यवहार और संपर्कों से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी मांगी।

केबिन से डायरी, धार्मिक साहित्य और व्यक्तिगत नोट्स भी मिले

जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित विद्यार्थियों, फैकल्टी और कर्मचारियों का डाटा भी लिया गया, ताकि नेटवर्क की संभावित कड़ियों की जांच की जा सके।छानबीन के दौरान डॉ. परवेज के केबिन से डायरी, धार्मिक साहित्य और व्यक्तिगत नोट्स सहित कई सामग्री मिली है। स्टाफ के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में उसके व्यवहार में काफी बदलाव आया था और प्रमोशन मिलने के बाद वह और अंतर्मुखी हो गया था।

शाहीन के परिवार के घर और परवेज के निवास पर सुरक्षा बढ़ी

टीम यह भी सुराग जुटा रही है कि उसने 7 नवंबर को बिना किसी पूर्व चर्चा के अचानक इस्तीफा क्यों भेजा। अधिकारियों को आशंका है कि उसे मॉड्यूल के उजागर होने की भनक लग गई थी, जिसके बाद वह भूमिगत हो गया था।उधर, शाहीन के परिवार के घर और परवेज के निवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अंजान लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण रखा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि एटीएस को मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा दी गई है और जांच में पूरा सहयोग जारी है।

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