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भिक्षा नहीं, हिसाब होगा – मंदिरों के बाहर अपराधियों की तलाश में जुटी पुलिस

एसएमयूपी न्यूज, लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में हनुमान सेतु के पास एक भिखारी द्वारा तीन अन्य भिखारियों पर चाकू से हमला कर देने की घटना ने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस घटना में एक की मौत हो गई, जिसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या धार्मिक स्थलों के आसपास मंडराने वाले सभी वाकई भिखारी हैं, या फिर उनके वेष में छिपे हैं अपराधी? अब पुलिस ने इन सवालों को गंभीरता से लेते हुए मोर्चा संभाल लिया है।

अब थानों को दी गई जिम्मेदारी, हर भिखारी की होगी कुंडली तैयार

हनुमान सेतु की घटना को प्रशासन ने ‘सिर्फ झगड़ा’ मानकर टालने के बजाय चेतावनी के रूप में लिया है। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर अब राजधानी के सभी थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद भिखारियों की सूची तैयार करें। न सिर्फ नाम-पता, बल्कि उनकी पृष्ठभूमि, गतिविधियां और ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जाएगी। डीसीपी अपराध कमलेश दीक्षित ने बताया कि अब किसी को भी ‘भिखारी’ समझकर अनदेखा नहीं किया जाएगा। हमारी टीम इनकी सही पहचान और इतिहास का पता लगाएगी। यदि कोई संदेहास्पद पाया गया, तो उस पर कानूनी कार्रवाई होगी।”

धार्मिक स्थलों पर भिखारियों की भीड,: आस्था या अपराध का मंच?

शहर के लगभग हर प्रमुख धार्मिक स्थल चाहे वह हनुमान सेतु हो, चंद्रिका देवी मंदिर या फिर काली मंदिर इन सभी जगहों पर बड़ी संख्या में भिखारी देखे जाते हैं। दर्शन को आए श्रद्धालुओं के चारों ओर इनका घेरा लग जाता है। कभी पैसा मांगते हैं, कभी प्रसाद, और कभी-कभी झगड़े पर भी उतर आते हैं।हनुमान सेतु की घटना इसका एक उदाहरण भर है। लेकिन इसके बाद यह सवाल और गहरा गया है कि इन भिखारियों की कोई पहचान न होने के कारण धार्मिक स्थल कहीं अपराधियों की पनाहगाह तो नहीं बन रहे?

भिखारियों की महिलाओं और विदेशी पर्यटकों पर रहती है नजर

ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब धार्मिक स्थलों के पास विदेशी पर्यटकों को भिखारियों ने परेशान किया है। अचानक टूट पड़ने वाली भीड़ से ना सिर्फ भय का माहौल बनता है, बल्कि किसी हादसे की आशंका भी बनी रहती है। खासकर विदेशी महिलाएं ऐसी भीड़ में खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।

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चंद्रिका देवी मंदिर में भी हुआ था हमला ,दुकानदारी के नाम पर गुंडागर्दी

हनुमान सेतु की घटना के कुछ ही दिन बाद राजधानी के प्रतिष्ठित चंद्रिका देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की घटना ने पूरे धार्मिक स्थल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसाद की दुकान पर दबाव बनाने और मनमानी कीमत पर बेचने को लेकर हुए विवाद ने श्रद्धालु पीयूष शर्मा और उनके परिवार को पीटे जाने तक पहुँचा दिया।

धार्मिक स्थल के प्रबंधन की भी बनती है जिम्मेदारी

धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखना केवल पुलिस का काम नहीं है। वहां के ट्रस्ट, प्रबंधक और दुकान संचालकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का ख्याल रखा जाए। अगर समय रहते स्थानीय प्रबंधन हरकत में आ जाए, तो कई घटनाओं से बचा जा सकता है। पुलिस की आम जनता से भी अपील है कि यदि किसी धार्मिक स्थल के पास संदिग्ध गतिविधियों वाला कोई भिखारी या व्यक्ति दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें। पुलिस या सुरक्षा कर्मियों को तत्काल सूचित करें। साथ ही धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को भी चाहिए कि वे CCTV, वालंटियर और स्वयंसेवी सुरक्षाकर्मी जैसे उपायों को सक्रिय रूप से अपनाएं।

अब सख्त निगरानी जरूरी

आस्था के स्थलों को अपराध का मंच बनने से रोकने के लिए अब सख्त निगरानी जरूरी है। एक भिखारी के हाथों हत्या की घटना से सबक लेते हुए अगर पुलिस और प्रबंधन ने ईमानदारी से काम किया, तो यह न सिर्फ अपराध पर अंकुश लगाएगा, बल्कि श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत करेगा।

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