एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और वर्तमान में भाजपा से राज्यसभा सदस्य ब्रजलाल ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बांगलादेशी घुसपैठियों की बढ़ती संख्या और इनके अपराधिक कृत्यों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने लखनऊ में रह रहे इन बांग्लादेश के नागरिकों को देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा बताते हुए मुख्यमंत्री से इन्हें वापस भेजने की अपील की है।
फेसबुक पेज पर पोस्ट लिखकर सीएम से की अपील
पूर्व पुलिस महानिदेशक और भाजपा सांसद ब्रजलाल ने आज अपने फेसबुक पेज पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है। पूर्व डीजीपी ने सुबह टहलने के दौरान ऐसे कुछ महिलाओं और पुरुषों से बातचीत कर उनके मूल निवास के बारे में जानकारी भी करने की बात कही है।
स्थानीय पुलिस प्रशासन की मंशा पर भी खड़ा किया सवाल
यह लोग खुद को असम का निवासी होने का दावा कर रहे थे, जबकि एक जमाने में खुद पीएसी बटालियन का नेतृत्व करते हुए उन्होंने असम में लंबा समय बिताय थ। उन्हें वहां की भौगाेिलक स्थित के बारे में पूरी तरह से जानकारी है। ब्रजलाल ने इन लोगों बांग्लादेश का नागरिक बताते हुए नगर निगम लखनऊ और स्थानीय पुलिस प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ही इस पर सख्त फैसला लेकर इन बांग्लादेशियों को वापस भेज सकते हैं।
पूरे लखनऊ में झुग्गी झोपड़ी बनाकर रह रहे बांग्लादेशी
पूर्व पुलिस महानिदेशक ब्रजलाल ने अपनी पोस्ट में लिखा है, मैं गोमतीनगर विस्तार में जब सुबह वॉक करता हूँ तो मुझे ये बांग्लादेशी सफाई करते हुए मिलते हैं। ये अपने को असम का निवासी बताते हैं, परंतु ये सब है अनाधिकृत रूप से रह रहे बांग्लादेशी। पूरे लखनऊ में ये झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहते हैं। दुखद यह है कि लखनऊ नगर निगम ने इन्हें सफाई कर्मी के रूप में तैनात कर रखा है। गोमतीनगर विस्तार में खाली जमीनों और गोमती नदी की तलहटी, नालों के किनारे इनकी बहुत सी झोपड़ियां मिल जायेंगी। इनके बारे में न तो लखनऊ पुलिस को चिंता है और न नगर निगम को। नगर निगम ने तो इन्हें सफाईकर्मी बनाकर अलग से मान्यता दे रखी है। ये अपने को असम के बोंगाई गांव का निवासी बताते हैं और कुछ नलबाड़ी, बरपेटा और नौगांव का।
कांग्रेस सरकारों में इन्हें वोट-बैंक के तौर पर बसाया गया था
भाजपा नेता ब्रजलाल ने लिखा, असम में यह वही स्थान हैं जहां कांग्रेस सरकारों में इन्हें वोट-बैंक के तौर पर योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया था। इंदिरा गांधी इन्ही बांग्लादेशियों के सहारे 1983 का असम चुनाव जीतना चाहती थीं, जिनकी संख्या उस समय लगभग 40 लाख थी। आल असम स्टूडेंट यूनियन , आल असम गण संग्राम की मांग थी कि पहले इन विदेशियों को बाहर करो, तब विधानसभा का चुनाव कराओ। इंदिरा अपनी जिद पर अड़ी रहीं, जिसके परिणामस्वरूप 12 फरवरी 1983 को नेल्ली दंगा हुआ, जिसने तीन – चार हजार लोग मारे गये थे।
ये बांग्लादेशी देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा
उन्होंने लिखा, लखनऊ में रह रहे ये बांग्लादेशी देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा हैं। जब से बांग्लादेश में कट्टरपंथियों और पाकिस्तान समर्थक सरकार बनी है, यह खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। बांग्लादेशी अपराधी गैंग डकैती, चोरी जैसी घटनाये कर रहे हैं। इतना ही नहीं बांग्लादेशी आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद- अल- इस्लामी (हूजी) ने देश में कई आतंकी घटनाए की हैं, जिसमें उत्तरप्रदेश भी शामिल है। खूँखार हूजी आतंकी बाबू भाई आदि अब भी उत्तरप्रदेश की जेल में हैं। 23 अक्टूबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी , अयोध्या की न्यायालयों में हुये बम-ब्लास्ट में हूजी का भी हाथ था।
सुरक्षा के लिहाज से इन्हें भगाना जरूरी
बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल- मुजाहिदीन बांग्लादेश भारत में भी सक्रिय है। उन्होंने चिंता जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, अगर इन अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को भारत से नहीं भगाया तो बांग्लादेशी आतंकी संगठनों को लखनऊ सहित देश में ठिकाना बनाने में मदद मिलेगी। लखनऊ की इन बांग्लादेशियों की झोपड़ियों में बहुत से बच्चे भी मिलेंगे। लखनऊ के चौराहों पर बांग्लादेशी महिलायें-बच्चे गुब्बारे, खिलौने और भीख मांगते मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में केवल योगी आदित्यनाथ ही कड़ा निर्णय लेकर इन्हें वापस बांग्लादेश भेज सकते हैं।
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