एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने राजधानी लखनऊ में बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की बैंक लोन ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का ब्रांच मैनेजर था, जिसने अपने पद और पहचान का दुरुपयोग कर गैंग तैयार किया और कई बैंकों से करोड़ों के लोन फर्जी तरीके से पास कराए। एसटीएफ ने 13 सितंबर 2025 की रात लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र स्थित ओमेक्स सिटी अपार्टमेंट से मैनेजर सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी और उनका परिचय

गौरव सिंह (40 वर्ष) – यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का ब्रांच मैनेजर, बीटेक व एमबीए पास। गिरोह का मास्टरमाइंड, जिसने सहकर्मियों की आईडी-पासवर्ड का दुरुपयोग कर फर्जी लोन पास किए।

नावेद हसन (42 वर्ष) – पुराने मामलों में भी ठगी और फर्जीवाड़े का आरोपी। “हिंद ट्रांसपोर्ट कंपनी” नाम से फर्जी फर्म बनाई थी।

अखिलेश तिवारी (37 वर्ष) – कई सालों से फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल, 2017 में भी लोन फ्रॉड में नामजद।

इन्द्रजीत सिंह (30 वर्ष) – फील्ड पर जाकर ग्राहक ढूंढता और उनकी फोटो/सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल करता था।

गिरोह के पास से पुलिस ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद

05 मोबाइल फोन

01 डेस्कटॉप व 01 प्रिंटर

268 फर्जी व असली लोन संबंधित दस्तावेज

कूटरचित आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस

02 चेकबुक

04 लग्जरी कारें (बीएमडब्ल्यू एक्स1, बलेनो, फोन्श, महिन्द्रा सुपरो)

रिलायंस डिजिटल का बिल वाउचर

750 रुपये नकद

इस तरह से हुआ खुलासा

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि राज बहादुर गुरुंग नामक व्यक्ति को बिजनेस के लिए लोन चाहिए था। उसने इन्द्रजीत से संपर्क किया। इन्द्रजीत ने उसे मैनेजर गौरव सिंह और नावेद हसन से मिलवाया। राज बहादुर से आधार और पैन कार्ड मंगवाए गए और बैंक में कई जगह सिग्नेचर कराए गए। महीनों बाद जब कोई लोन नहीं मिला तो राज बहादुर को ईएमआई बकाया का मैसेज आया। जांच में पता चला कि उसके नाम से 9.80 लाख रुपये का मुद्रा लोन और 15 लाख रुपये का कार लोन यूनियन बैंक शाखा जानकीपुरम से पास हो चुका है।यहीं से एसटीएफ की साइबर टीम सक्रिय हुई और जांच में सामने आया कि गिरोह ने पहले भी कई लोगों को इसी तरह ठगा है।

गिरोह का काम करने का तरीका

ग्राहक को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनका लोन पास होगा।

उनसे पहले ही सभी फॉर्म व बाउचर पर हस्ताक्षर करा लिए जाते।

लोन की रकम असली ग्राहक के बजाय फर्जी फर्मों के खातों में ट्रांसफर हो जाती।

जिन खातों में पैसा आता, उनका संचालन मैनेजर गौरव सिंह और साथी करते।

रकम निकालकर कैश में बांट ली जाती।

गिरोह मुख्य रूप से मुद्रा लोन, ऑटो लोन, बिजनेस लोन और वर्किंग कैपिटल लोन पास कराता था।

आरोपियों के बयान

पूछताछ में नावेद हसन ने माना कि उसने 2015 से ही फर्जी आधार और दस्तावेज बनाकर फर्में तैयार कीं और अलग-अलग बैंकों से वाहन व व्यापारिक लोन पास कराए। इसी दौरान उसकी पहचान गौरव सिंह से हुई और दोनों ने मिलकर एक गैंग बना लिया।गौरव सिंह ने भी स्वीकार किया कि उसने बैंक मैनेजर होने का फायदा उठाया और सहायक मैनेजरों की आईडी-पासवर्ड का अवैध इस्तेमाल कर रिपोर्टिंग में हेराफेरी की।

पुराने मामले और नेटवर्क

अखिलेश तिवारी और नावेद पर पहले से ही लोन फ्रॉड से संबंधित मुकदमे दर्ज हैं। एसटीएफ को संदेह है कि इस गिरोह ने अन्य बैंक अधिकारियों के साथ भी मिलकर ठगी की है। इनके द्वारा बनाए गए कई फर्जी खातों और वॉलेट्स की जांच की जा रही है।

कानूनी कार्रवाई

चारों आरोपियों पर थाना साइबर क्राइम लखनऊ में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर धारा 419, 420, 467, 468, 471 भादवि व आईटी एक्ट की धाराएं 66C, 66D लगाई गई हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

एसटीएफ की सफलता

एएसपी विशाल विक्रम सिंह की देखरेख में एसटीएफ की साइबर टीम ने इस गिरोह का भंडाफोड़ कर बैंकिंग सेक्टर में चल रही संगठित ठगी को उजागर किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उन अपराधियों के लिए बड़ा संदेश है जो बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर जनता के साथ ठगी करते हैं।

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