एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । डीजीपी राजीव कृष्ण एवं भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अधिकारियों के मध्य साइबर अपराध पर विचार विमर्श के लिए पुलिस मुख्यालय, सिग्नेचर बिल्डिंग गोमतीनगर विस्तार, लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक साइबर क्रइम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए राज्य और केंद्र के बीच सहयोग को मजबूत करना था। दोनों पक्षों ने मिलकर यह विचार किया कि आम जनता को सुरक्षित रखने के लिए कैसे नई पहलों और बेहतर समन्वय के माध्यम से काम किया जा सकता है। बैठक में मुख्यतः निम्न प्रमुख चर्चाएं हुईं।
संस्थागत और प्रशासनिक विषयों पर चर्चा
-उत्तर प्रदेश में एक विशेष केंद्र स्थापित करने पर चर्चा हुई, जो साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच पर केंद्रित होगा।
-इसमें महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों को अलग से देखने की भी योजना पर बात हुई।
-साइबर अपराध से जुड़े मामलों में लोगों की शिकायतों को तुरंत दर्ज करने के लिए एक सुविधाजनक प्रक्रिया शुरू करने की संभावना पर चर्चा हुई।
-इस क्षेत्र में विशेष रूप से प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों को जिम्मेदारी देने के तरीकों पर विचार किया गया।
-कामकाज और सेवा व्यवस्था में सुधार
-साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों और जानकारी को बेहतर तरीके से कैसे एकत्र और प्रबंधित किया जाए।
-जिलों में मिल रही शिकायतों की निगरानी और उनके निपटारे की गुणवत्ता को मापने के लिए एक केंद्रीय व्यवस्था बनाने की बात हुई।
-धोखाधड़ी या ठगी के मामलों में पीड़ितों को राहत दिलाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
सुरक्षा और नागरिक सहायता
-उन क्षेत्रों की पहचान करने पर चर्चा हुई जहाँ साइबर ठगी सबसे ज्यादा हो रही है और ऐसे क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की बात हुई।
-लोगों के ठगे गए पैसे की जल्द से जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित टीम की जरूरत महसूस की गई।
पुलिस प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
-पूरे प्रदेश में पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की पहचान और जांच के बारे में विशेष प्रशिक्षण देने की योजना पर चर्चा हुई।
-यह प्रशिक्षण नए भर्ती होने वाले और पहले से सेवा में कार्यरत पुलिसकर्मियों दोनों के लिए होगा।
जन-जागरूकता और नागरिक संवाद
-जिलों में लोगों को साइबर अपराधों से सतर्क करने के लिए अभियान चलाने पर चर्चा हुई, जिसमें पोस्टर, वीडियो और स्कूलों-पंचायतों में कार्यक्रमों की भूमिका पर जोर दिया गया।
-उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले साइबर सुरक्षा अभियानों से जोड़ने की संभावना भी सामने रखी गई।
बैठक में यह सहमति बनी
-ऐसे अपराधों की पहचान और रोकथाम
-पुलिस की तैयारी और प्रशिक्षण
-जनता के बीच जागरूकता फैलाना
केंद्र और राज्य के बीच साझा प्रयासों की सख्त जरूरत
बैठक के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र और राज्य के बीच साझा प्रयासों की सख्त जरूरत है। दोनों पक्षों ने इस दिशा में आपसी समन्वय बढ़ाने और नियमित संवाद बनाए रखने पर सहमति जताई।उत्तर प्रदेश पुलिस और (I4C) की यह साझेदारी आने वाले समय में राज्य को साइबर अपराध से लड़ने के क्षेत्र में एक अग्रणी मॉडल बना सकती है, जिससे देश के अन्य राज्य भी प्रेरणा ले सकते हैं।इस बैठक में I4C के CEO राजेश कुमार एवं रूपा.एम. IG threat analytics unit सम्मिलित हुए।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय की एक पहल
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) भारत सरकार के गृह मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देश में साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक रूप से निपटना है।I4C का मुख्य फोकस नागरिकों से संबंधित साइबर अपराध से जुड़े सभी पहलुओं को प्रभावी ढंग से संभालना है, जिसमें विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, साइबर अपराध से निपटने की भारत की समग्र क्षमता को सुदृढ़ करना, तथा नागरिकों की संतुष्टि के स्तर को बढ़ाना शामिल है।जनवरी 2020 में स्थापना के पश्चात से यह केंद्र देश की सामूहिक साइबर अपराध निवारण क्षमता को सशक्त करने तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने की दिशा में सतत कार्य कर रहा है।
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