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बिहेवियरल ट्रेनिंग और कम्युनिकेशन स्किल्स पुलिसिंग की आत्मा होनी चाहिए : डीजीपी

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एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ।यूपी पुलिस को और अधिक संवेदनशील, संवाद कुशल एवं जनोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण द्वारा सोमवार को बिहेवियरल ट्रेनिंग प्रोग्राम पर आधारित कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। यह पांच दिवसीय कार्यशाला भारत सरकार के क्षमता निर्माण आयोग (CBC) के सहयोग से, उसके नॉलेज पार्टनर इल्युमिन द्वारा पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय, लखनऊ में आयोजित की गई है।सीएम की मंशा के अनुरूप प्रदेश पुलिस बल को जनसेवा, सद्व्यवहार एवं व्यवहारिक कुशलता जैसे सॉफ्ट स्किल्स में प्रशिक्षित करने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।

60 हजार से अधिक आरक्षियों को मिलेगा सॉफ्ट स्किल्स का प्रशिक्षण

इस अवसर पर DGP प्रशिक्षण तिलोत्तमा वर्मा, ADG बीडी पॉलसन, IG चन्द्र प्रकाश सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि प्रदेश में नियुक्त किए गए 60,244 नए आरक्षियों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत संचार कौशल, जनसंपर्क, और सद्व्यवहार का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।इसके लिए पुलिस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय कर्मयोगी मिशन के iGOT पोर्टल को भी शामिल किया गया है। सभी प्रशिक्षु आरक्षियों के लिए iGOT पर उपलब्ध दो कोर्सेस को पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है।

जनसेवा कार्यक्रम और सद्व्यवहार पर व्याख्यान

कार्यक्रम में क्षमता निर्माण आयोग (CBC) के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने “जनसेवा कार्यक्रम” की अवधारणा पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि सरकारी सेवकों को दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना से कार्य करने के लिए प्रेरित करना इस मिशन का उद्देश्य है। डॉ. बालासुब्रमण्यम स्वयं हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स और BITS पिलानी से एम.फिल हैं तथा एक प्रसिद्ध नेतृत्व प्रशिक्षक एवं लेखक भी हैं।

प्रशिक्षण का महत्त्व—डीजीपी का संबोधन

डीजीपी राजीव कृष्ण ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में पुलिस के व्यवहार में बदलाव आया है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।इंडक्शन ट्रेनिंग किसी भी अधिकारी के पूरे करियर की दिशा तय करता है, इसलिए इसे गम्भीरता से लिया जाना चाहिए।यूनिफॉर्म कंटेंट, ऑडियो-विजुअल माध्यम और डिजिटल टूल्स के ज़रिए प्रशिक्षण और भी प्रभावशाली बनाया जाएगा।बिहेवियरल ट्रेनिंग और कम्युनिकेशन स्किल्स पुलिसिंग की आत्मा होनी चाहिए। इसका केवल पालन ही नहीं, बल्कि उसे आंतरिक रूप से आत्मसात करना आवश्यक है।उन्होंने कुंभ मेले का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मियों का सद्व्यवहार लगातार प्रशिक्षण, ब्रीफिंग और काउंसलिंग का ही परिणाम है।

लीड कोचेस तैयार होंगे

इस कार्यशाला के माध्यम से लीड ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में तैनात शिक्षकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण देंगे। इनसे आगे चलकर लीड कोचेस तैयार होंगे, जो सीधे नवनियुक्त आरक्षियों को व्यवहार, संवाद और सॉफ्ट स्किल्स में दक्ष बनाएंगे।

PTS उन्नाव की पहल

ADG नवनीत सिकेरा ने बताया कि उन्होंने अपने प्रशिक्षण संस्थान (PTS उन्नाव) में 32 पीटीआई को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें हेल्थ कोचेस के रूप में तैयार किया है, जो जल्द ही नए रिक्रूट्स को ट्रेन करेंगे। इसका प्रस्तुतीकरण शीघ्र ही डीजीपी के समक्ष किया जाएगा।

समापन में स्पष्ट संदेश

कार्यशाला के समापन पर DGP ने सभी प्रशिक्षण संस्थानों के प्रभारियों को निर्देश दिए कि वे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने में कोई कसर न छोड़ें। उन्होंने कहा कि इस सुनहरे अवसर का पूरा उपयोग करते हुए पुलिस की जनसामान्य के प्रति छवि को सकारात्मक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।यह कार्यशाला न केवल पुलिस बल की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने का प्रयास है, बल्कि समाज और पुलिस के बीच विश्वास की एक नई नींव रखने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल भी है।

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