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Road accident: चौबीस घंटे में सड़कों पर पसरा मातम, मासूम समेत पांच की दर्दनाक मौत

लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ में बीते 24 घंटे के भीतर सड़कों पर ऐसी खून की लकीरें खिंच गईं, जिनका गवाह बना हर इलाका शोक में डूब गया। अलग-अलग स्थानों पर हुए पाँच हादसों ने पाँच जिंदगियों को लील लिया। इनमें तीन साल का मासूम भी शामिल है, जिसकी करुण मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।

बेटी के सिर पर टूटा कफन

गोसाईंगंज निवासी विक्रम कुमार और उनकी पत्नी किरन मेहनत-मजदूरी करके बच्चों का पेट पालते हैं। बुधवार को वह अपने बच्चों को लेकर गांव से लौट रहे थे कि गोमतीनगर विस्तार में तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। उनकी आठ साल की बेटी कुसुम सिर में गंभीर चोट लगने से दम तोड़ बैठी। वहीं, विक्रम, किरन और छोटी बेटी घायल हो गए। कुसुम कक्षा दो की छात्रा थी, उसकी मौत ने पूरे परिवार की उम्मीदें तोड़ दीं।

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रिटायर्ड अधिकारी की भी गई जान

रहीमाबाद में रहने वाले 65 वर्षीय अशोक कुमार अवस्थी, जो रेलवे के डाक विभाग से सेवानिवृत्त थे, बुधवार को बाइक से घर लौटते वक्त तेज रफ्तार कार की चपेट में आ गए। हेलमेट पहनने के बावजूद जान नहीं बच सकी। उनकी मौत से परिवार में पत्नी संतोष और बेटों का रो-रोकर बुरा हाल है।

काम पर आई महिला सड़क पर गई जान गंवा

बीकेटी क्षेत्र में 55 वर्षीय रामदुलारी, जो एक बाग की देखभाल करती थीं, अपने बेटों के साथ ऑटो से बख्शी का तालाब पहुंचीं। ऑटो से उतरकर जैसे ही बाग की ओर चलीं, एक बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। वे उछलकर पेड़ से टकराईं और मौके पर ही मौत हो गई।

फुटपाथ पर भी सुरक्षित नहीं मजदूर

गाजीपुर में बहराइच से आए मजदूर राम रतन साथियों के साथ फुटपाथ पर सो रहे थे। देर रात आंधी आने पर सभी सड़क किनारे खड़े हो गए, तभी एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। रतन की मौके पर ही मौत हो गई। वह अपने पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गया।

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खेलते-खेलते गई जान, तीन साल का मासूम कुचला गया

सबसे हृदय विदारक हादसा गोसाईंगंज के शहजादेपुर गांव में हुआ, जहां तीन वर्षीय दिव्यांशु ट्रैक्टर पर खेलते समय अनजाने में उसे न्यूट्रल कर बैठा। ट्रैक्टर ढलान पर पीछे की ओर खिसकने लगा और दिव्यांशु उसके नीचे आ गया। ट्रैक्टर का पिछला पहिया उस पर चढ़ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दिव्यांशु अपने माता-पिता की इकलौती संतान था।इन सभी घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सड़कें अब सिर्फ रास्ते नहीं, असावधानी और तेज रफ्तार की कब्रगाह बनती जा रही हैं। सवाल यह भी उठता है कि क्या इन मौतों से कोई सबक लिया जाएगा?

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