संभल में जियो पेमेंट बैंक के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का फैसला, विवादित 4 हजार रुपये के अलावा पूरी रकम रोकने पर जताई आपत्ति, 5 हजार रुपये क्षतिपूर्ति का आदेश
संभल। साइबर फ्रॉड के मामलों में बैंक खातों पर रोक लगाने को लेकर संभल जिला उपभोक्ता आयोग ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। आयोग ने एक मामले में कहा कि यदि खाते में किसी विशेष धनराशि के फर्जी या संदिग्ध तरीके से ट्रांसफर होने की बात सामने आती है तो विवादित राशि पर रोक लगाई जा सकती है, लेकिन इसके आधार पर पूरे खाते को ब्लॉक करना उपभोक्ता के हितों के खिलाफ है।
मामला सरायतरीन के मोहल्ला भालेभाज खां निवासी जीतू पुत्र शिवौतार से जुड़ा है। अधिवक्ता पारस वार्ष्णेय के अनुसार, जीतू ने मोबाइल फोन से लेनदेन की सुविधा के लिए जियो पेमेंट बैंक में ऑनलाइन खाता खोला था। खाते में वह समय-समय पर रकम जमा करता था। खाते में करीब 50 हजार रुपये जमा थे।
अचानक बंद कर दिया गया बैंक खाता
शिकायत के मुताबिक, जियो पेमेंट बैंक ने 16 जुलाई 2025 को अचानक जीतू का खाता बंद कर दिया। जब खाताधारक ने बैंक से इसका कारण पूछा और पत्राचार किया तो उसे बताया गया कि 25 जनवरी 2025 को उसके खाते में 4 हजार रुपये फर्जी तरीके से ट्रांसफर हुए थे। इसी आधार पर खाते को ब्लॉक किया गया था।
जीतू ने बैंक से कहा कि उसके खाते में किसी भी तरह की फर्जी धनराशि ट्रांसफर नहीं हुई है। उसका कहना था कि यदि बैंक के अनुसार खाते में 4 हजार रुपये संदिग्ध तरीके से आए हैं तो केवल उस राशि के आहरण पर रोक लगाई जाए। पूरी जमा रकम पर रोक लगाना उचित नहीं है।
करीब 50 हजार रुपये खाते में थे
खाताधारक के अनुसार, खाते में करीब 50 हजार रुपये जमा थे और वह अपनी जरूरत के लिए इस रकम का इस्तेमाल करना चाहता था। उसने बैंक अधिकारियों से खाते को अनब्लॉक करने का अनुरोध किया, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
इसके बाद जीतू ने अधिवक्ता पारस वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। मामले में क्षेत्रीय अभिकर्ता की ओर से जवाब दाखिल किया गया, जबकि बैंक की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।

आयोग ने पूरे खाते को ब्लॉक करने पर जताई आपत्ति
मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि बैंक द्वारा पूरे खाते को ब्लॉक करना उपभोक्ता हितों के अनुरूप नहीं है। आयोग ने जियो पेमेंट बैंक को उपभोक्ता का ऑनलाइन बैंक खाता संख्या 003320392075971 अनब्लॉक करने का आदेश दिया।
आयोग ने बैंक को उपभोक्ता को 5 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने का भी निर्देश दिया है।
साइबर अपराध बढ़ने पर विशेषज्ञों की जरूरत
मामले में अधिवक्ता पारस वार्ष्णेय ने कहा कि आधुनिक तकनीक के विकास के साथ साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पर्याप्त साइबर विशेषज्ञों की कमी के कारण कई मामले उलझ जाते हैं। इससे एक ओर उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर मुकदमों का बोझ भी बढ़ता है।
उन्होंने सरकार से पर्याप्त संख्या में साइबर विशेषज्ञों की नियुक्ति किए जाने की जरूरत बताई, ताकि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच और उनके समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
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