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‘ससुराल से मिला गिफ्ट’ या काली कमाई का खेल? 35 करोड़ की संपत्ति मामले में रिटायर्ड एआरटीओ पर विजिलेंस का शिकंजा कसता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच सेवानिवृत्त सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार का मामला अब प्रदेश के सबसे चर्चित आय से अधिक संपत्ति मामलों में शामिल हो गया है। लखनऊ के अलीगंज स्थित उनके आवास पर विजिलेंस की छापेमारी में करोड़ों रुपये की नकदी, सोना-चांदी, निवेश और संपत्तियों के दस्तावेज मिलने के बाद जांच एजेंसियां लगातार उनके वित्तीय नेटवर्क की परतें खोल रही हैं।

करोड़ों रुपये की नकदी के बारे में सवाल

सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान जब अधिकारियों ने बरामद संपत्तियों और करोड़ों रुपये की नकदी के बारे में सवाल किए तो ललित कुमार ने पहले इन्हें ससुराल पक्ष से मिले उपहार और पारिवारिक संपत्ति बताया। लेकिन जैसे-जैसे विजिलेंस अधिकारियों ने बैंक खातों के लेन-देन, संपत्ति खरीद के दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड सामने रखे, उनके दावों की परतें खुलती चली गईं। पूछताछ के दौरान कई सवालों पर वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

दो दिन तक चली छापेमारी, एक-एक दस्तावेज की हुई जांच

विजिलेंस की टीम ने अदालत से सर्च वारंट लेने के बाद लखनऊ के अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी में ललित कुमार के आवास पर पुलिस बल की मौजूदगी में छापेमारी की। घंटों चली कार्रवाई के दौरान घर के हर कमरे, लॉकर और तिजोरियों की गहन तलाशी ली गई। कार्रवाई अगले दिन सुबह तक जारी रही।

टीम को दो बड़ी तिजोरियां मिलीं

तलाशी के दौरान टीम को दो बड़ी तिजोरियां मिलीं, जिनमें भारी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के बिस्किट, आभूषण और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे हुए थे। इसके अलावा बैंक लॉकर, फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड, पोस्ट ऑफिस निवेश और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड भी बरामद किए गए।

35 करोड़ की संपत्ति जांच के घेरे में

विजिलेंस के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक अब तक करीब 35 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां जांच के दायरे में आई हैं। इनमें करीब 1.62 करोड़ रुपये नकद, बड़ी मात्रा में सोना-चांदी, करोड़ों रुपये के निवेश और 15 अचल संपत्तियों के दस्तावेज शामिल हैं।जांच में सामने आया कि जिन संपत्तियों को वर्षों पहले करीब 13 करोड़ रुपये में खरीदा गया था, उनकी वर्तमान बाजार कीमत 30 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।

परिजनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की भी होगी पड़ताल

विजिलेंस अब केवल ललित कुमार ही नहीं, बल्कि उनके परिजनों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी जांच कर रही है। इसके लिए कई जिलों के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से संपत्ति खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सेवाकाल के दौरान उनकी जिन-जिन जिलों में तैनाती रही, वहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार या अनियमितताओं की शिकायतें दर्ज हुई थीं या नहीं।

ईडी भी कर सकती है कार्रवाई

मामले में विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी नजर इस प्रकरण पर है। यदि जांच में अवैध धन के लेन-देन या मनी लॉन्ड्रिंग के साक्ष्य मिलते हैं तो ईडी अलग से मामला दर्ज कर सकती है। राज्य सरकार भी संदिग्ध संपत्तियों की जब्ती की कानूनी प्रक्रिया पर विचार कर रही है।

2020 की शिकायत से शुरू हुई थी जांच

विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, ललित कुमार के खिलाफ परिवहन आयुक्त की शिकायत के आधार पर वर्ष 2020 में भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) ने जांच शुरू की थी। जांच में उनकी वैध आय और खर्च के बीच भारी अंतर सामने आया। इसके बाद वर्ष 2024 में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज किया गया, जिसकी विवेचना बाद में विजिलेंस को सौंप दी गई।

परिवहन विभाग में मचा हड़कंप

इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे कई अधिकारियों में बेचैनी बढ़ गई है। हालांकि अन्य अधिकारियों के खिलाफ किसी नई जांच की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल विजिलेंस इस पूरे मामले की वित्तीय, तकनीकी और कानूनी जांच में जुटी है। आने वाले दिनों में ललित कुमार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। जांच एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि कथित तौर पर अर्जित संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या है और इसमें किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भी भूमिका रही है या नहीं।

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