पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता की दिनदहाड़े हुई थी हत्या
लखनऊ। करीब 24 वर्ष पुराने बहुचर्चित इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में मंगलवार को लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने शूटर विक्रम यादव उर्फ कालिया, उसके साथी पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद के साथ जुर्माने की भी सजा सुनाई।इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने 30 जून को तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी होने के बाद मंगलवार को अदालत ने अपना अंतिम निर्णय सुनाया।
वर्ष 2002 में हुई थी सनसनीखेज हत्या
यह चर्चित वारदात 8 अगस्त 2002 को लखनऊ में हुई थी। उस समय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष इंद्रदेव सिंह स्कूटर से जा रहे थे। जब वे डीएम कार्यालय के पीछे स्थित गली से गुजर रहे थे, तभी स्कूटर सवार बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।हमले में उन्हें दो गोलियां लगीं, जिनमें से एक गोली गर्दन में लगी। गंभीर रूप से घायल इंद्रदेव सिंह मौके पर ही गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई। दिनदहाड़े हुई इस हत्या से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी।
पहले स्थानीय पुलिस, फिर सीबीआई ने संभाली जांच
घटना के बाद शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की, लेकिन मामले की गंभीरता और चर्चित होने के कारण जांच बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि घटना के समय बृजेश यादव उर्फ मुन्ना स्कूटर चला रहा था, जबकि पीछे बैठे विक्रम यादव उर्फ कालिया ने इंद्रदेव सिंह पर गोलियां चलाई थीं। जांच में पन्ना सिंह की भी साजिश और अपराध में भूमिका सामने आई, जिसके आधार पर तीनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
साजिश रचने के आरोपियों की हो चुकी है मौत
मुकदमे के दौरान हत्या की साजिश रचने के आरोपी मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता और छोटेलाल उर्फ छोटू की मृत्यु हो गई। उनकी मौत के बाद अदालत ने उनके खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही समाप्त कर दी।
वर्तमान पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता थे इंद्रदेव सिंह
इंद्रदेव सिंह प्रदेश के चर्चित अधिवक्ताओं में गिने जाते थे और बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके थे। वे वर्तमान में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता थे। उनकी हत्या उस समय प्रदेश की सबसे चर्चित आपराधिक घटनाओं में शामिल रही थी।
24 साल बाद मिला न्याय
करीब ढाई दशक तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को मामले का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अदालत द्वारा तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के साथ ही लंबे समय से लंबित इस बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया ने निर्णायक मोड़ लिया।
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