लखनऊ । पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े हाईप्रोफाइल हत्याकांड में अब एक के बाद एक ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जिसने जांच एजेंसियों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी राज सिंह का नाम अब केवल एक साजिशकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि नेताओं, बाहुबलियों और कथित माफिया नेटवर्क से जुड़े चेहरे के रूप में सामने आ रहा है।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इतने हाईप्रोफाइल मर्डर केस की गुत्थी किसी मुखबिर या तकनीकी सर्विलांस से नहीं, बल्कि एक मामूली से यूपीआई पेमेंट से खुली। यही डिजिटल ट्रांजैक्शन हत्यारों तक पुलिस को ले गया।

अयोध्या से गिरफ्तारी, बिहार से दबोचे गए साथी

कोलकाता पुलिस की विशेष टीम ने यूपी के बलिया निवासी राज सिंह को अयोध्या-बस्ती हाईवे से गिरफ्तार किया। इसके अलावा बिहार के बक्सर से उसके दो साथियों मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्या को भी दबोचा गया। पुलिस का दावा है कि राज सिंह ने शूटरों को संसाधन, लॉजिस्टिक सपोर्ट और भागने में मदद उपलब्ध कराई।बताया जा रहा है कि हत्या के बाद आरोपी लगातार लोकेशन बदल रहे थे। इसी दौरान अयोध्या-बस्ती मार्ग के एक टोल प्लाजा पर किए गए यूपीआई भुगतान ने पूरी कहानी पलट दी। डिजिटल ट्रेल से पुलिस सीधे आरोपियों तक पहुंच गई।

नेताओं और माफिया से संपर्क!

जांच में सामने आया है कि राज सिंह खुद को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का प्रदेश महासचिव बताता था। सोशल मीडिया पर उसकी कई तस्वीरें प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं, बाहुबलियों और कथित माफिया से जुड़ी बताई जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक उसके संबंध प्रदेश सरकार के एक मंत्री, पूर्वांचल के कुछ राजनीतिक चेहरों और अपराध जगत से जुड़े लोगों तक बताए जा रहे हैं।राज सिंह पहले पार्षद का चुनाव भी लड़ चुका है और बलिया के चिलकहर क्षेत्र से ब्लॉक प्रमुख चुनाव लड़ने की तैयारी में था। उसके खिलाफ पहले से हत्या का मुकदमा दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है।

शादी में आया, फिर अयोध्या पहुंचा… और पकड़ लिया गया

जांच एजेंसियों के मुताबिक, हत्या के अगले ही दिन यानी 7 मई को राज सिंह लखनऊ में एक एमएलसी की बेटी की शादी में शामिल होने पहुंचा था। वहां से वह परिवार के साथ अंबेडकरनगर गया और बाद में अयोध्या दर्शन करने पहुंचा। वापसी के दौरान टोल प्लाजा पर हुए यूपीआई भुगतान से उसकी पहचान उजागर हो गई।

डेढ़ महीने पहले रची गई थी साजिश

कोलकाता पुलिस की एसआईटी को शक है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि इसे बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया। जांचकर्ताओं का दावा है कि आरोपियों ने पहले रेकी की, गतिविधियों पर नजर रखी और फिर पूरी योजना के तहत हत्या की वारदात को अंजाम दिया।पुलिस का मानना है कि इस पूरे षड्यंत्र में कम से कम आठ लोग शामिल थे। इनमें से एक पेशेवर शूटर भी हो सकता है।

मां बोली- बेटा बेगुनाह, CBI जांच हो

वहीं दूसरी तरफ राज सिंह की मां ने बेटे को निर्दोष बताते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उनके बेटे को साजिशन फंसाया जा रहा है।फिलहाल तीनों आरोपियों को बारासात कोर्ट ने 13 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच एजेंसियां राजनीतिक कनेक्शन, फंडिंग और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।

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