लखनऊ। प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध ने अब बड़ा रूप लेना शुरू कर दिया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऐलान किया है कि 13 मई को प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों और ताप बिजलीघरों के कर्मचारी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और कार्यालय समय समाप्त होने के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।संघर्ष समिति के मुताबिक पश्चिमांचल और दक्षिणांचल के विभिन्न जिलों में जन-जागरण अभियान चलाने के बाद अब मध्यांचल के जनपदों में सभाएं आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही

कर्मचारियों का मुख्य विरोध पनकी ताप बिजलीघर और जवाहरपुर ताप बिजलीघर के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस कार्य को 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को सौंपे जाने के निर्णय को लेकर है। संघर्ष समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार और पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और व्यापक होगा।संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि एक तरफ पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल बिजली कर्मियों से गर्मियों में बेहतर विद्युत आपूर्ति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है।

आंदोलन के दौरान भी कर्मचारियों को निर्देश दिए गए

समिति का कहना है कि बिजली कर्मियों की प्राथमिकता हमेशा उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना रही है। आंदोलन के दौरान भी कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं और किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि बिजली कर्मियों के खिलाफ की गई कथित दमनात्मक और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही ऊर्जा मंत्री द्वारा 19 मार्च 2023 को दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए निजीकरण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में राहत दी जाए।बिजली कर्मियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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