लखनऊ। प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग पर विवाद गहराता जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अन्यथा आने वाली गर्मियों में बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों का भी विरोध
संघर्ष समिति ने बताया कि विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेई और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर समेत कई जनप्रतिनिधि भी इस व्यवस्था का विरोध कर चुके हैं और इसे समाप्त करने की मांग उठा चुके हैं।
क्या है विवाद की वजह?
संघर्ष समिति के अनुसार, वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग के चलते बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की गई है और नियमित पदों को समाप्त किया जा रहा है, जिससे बिजली व्यवस्था कमजोर हो रही है। लखनऊ, अयोध्या समेत कई शहरों में इसका असर दिखने लगा है।
गर्मियों को लेकर बढ़ी चिंता
समिति का कहना है कि आगामी गर्मियों में बिजली की मांग 36,000 मेगावाट से अधिक पहुंच सकती है। ऐसे समय में अनुभवी कर्मचारियों की कमी व्यवस्था को और बिगाड़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
प्रीपेड मीटर पर भी सवाल
संघर्ष समिति ने प्रीपेड मीटर प्रणाली को भी उपभोक्ताओं के लिए नई समस्या बताते हुए कहा कि इससे लोगों की दिक्कतें बढ़ रही हैं।समिति ने साफ कहा कि यदि वर्टिकल व्यवस्था समाप्त नहीं की गई और हटाए गए कर्मचारियों को बहाल नहीं किया गया, तो गर्मियों में बिजली संकट की पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।
जारी है विरोध और जनसंपर्क
निजीकरण के विरोध और कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई के खिलाफ बिजली कर्मियों ने अवकाश के दिन भी जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया।
