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राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारी तेज, निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का आंदोलन हुआ और धारदार

लखनऊ। बिजली क्षेत्र के निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और श्रम संहिताओं के विरोध में 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच और संयुक्त किसान मोर्चा के समर्थन से उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों में जबरदस्त उत्साह और जोश देखने को मिल रहा है। पिछले 440 दिनों से जारी आंदोलन को देशव्यापी समर्थन मिलने से संघर्ष और मजबूती के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है।

संयुक्त किसान मोर्चा भी बिजली कर्मियों के आंदोलन के साथ खड़ा

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि इंटक, एटक, सीटू, एचएमएस, एआईयूटीयूसी, सीसीटीयू, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी जैसे दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन किया है। इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा भी बिजली कर्मियों के आंदोलन के साथ खड़ा है।

पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग

संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति (नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स) ने भी केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025, उत्तर प्रदेश में चल रही बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया और पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।

व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा

हड़ताल को सफल बनाने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों और बिजली परियोजनाओं में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। बिजली कर्मी आम उपभोक्ताओं को निजीकरण के दुष्परिणामों और प्रस्तावित कानूनों के असर के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसके साथ ही संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप दिया है।

बिजली दरें बढ़ेंगी और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित होंगे

संघर्ष समिति का कहना है कि देशभर के लगभग 25 करोड़ कर्मचारियों और मजदूरों का समर्थन मिलने से उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में और अधिक मजबूती से संघर्ष करेंगे। उनका दावा है कि निजीकरण से बिजली दरें बढ़ेंगी और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित होंगे।इस क्रम में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में प्रदेश के सभी जनपदों और बिजली परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। संघर्ष समिति ने साफ किया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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