लखनऊ। उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी छात्र शशि शेखर दुबे ने अपनी हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा की कॉपियां देखने के लिए लगभग 9 महीने तक संघर्ष किया। यह मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा, और आखिरकार माध्यमिक शिक्षा परिषद को छात्र की मांग माननी पड़ी। आयोग ने परिषद को फटकार लगाई और चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

शशि शेखर ने पिछले यूपी बोर्ड से हाईस्कूल परीक्षा पास की थी

शशि शेखर ने पिछले यूपी बोर्ड से हाईस्कूल परीक्षा पास की थी। परीक्षा में उन्हें गणित में 100, हिंदी में 92, विज्ञान में 90, सामाजिक विज्ञान में 87, चित्रकला में 84 और अंग्रेजी में 73 अंक मिले। हालांकि शशि को गणित को छोड़कर अन्य विषयों में उम्मीद से कम अंक मिलने का संदेह था।इसके चलते उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत माध्यमिक शिक्षा परिषद के जनसूचना अधिकारी से सभी विषयों की कॉपियां देखने की मांग की। परंतु परिषद ने उन्हें सूचना देने से इनकार कर दिया। अपीलीय अधिकारी ने कहा कि अभी स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए कॉपियां नहीं दी जा सकतीं।

आयोग के सूचना आयुक्त मो. नदीम ने सुनवाई की

छात्र ने तब राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल की। आयोग के सूचना आयुक्त मो. नदीम ने सुनवाई की। इस दौरान परिषद ने दावा किया कि कॉपियां दिखाने का नियम अब समाप्त हो गया है।आयोग ने अगली सुनवाई में परिषद को नियम की प्रति पेश करने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि नियम पेश नहीं किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डर के मारे परिषद ने अंततः छात्र को कॉपियां उपलब्ध करवा दीं और आयोग को सूचित किया।

छात्र को अपनी परीक्षा की कॉपियां देखने का पूरा हक

आयोग ने इस दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि यूपी बोर्ड का रवैया मेधावी छात्र के प्रति अत्यंत टालमटोल और असंवेदनशील रहा। आयोग ने स्पष्ट किया कि छात्र को अपनी परीक्षा की कॉपियां देखने का पूरा हक है और शिक्षा विभाग को ऐसे मामलों में पारदर्शी और संवेदनशील रहना चाहिए।यह मामला मेधावी छात्रों के अधिकार और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की आवश्यकता पर एक सशक्त उदाहरण बन गया है।

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