गाजियाबाद। मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात। घड़ी में करीब दो बजे का वक्त। भारत सिटी सोसायटी की ऊंची इमारतें नींद में डूबी थीं। अचानक एक तेज आवाज… फिर दूसरी… और तीसरी। सोसायटी के पार्क में गिरी तीन मासूम जिंदगियों ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया।नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली ये कोई आम लड़कियां नहीं थीं—ये थीं तीन सगी बहनें: निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12)। तीनों ने एक साथ मौत को गले लगा लिया।सुबह होते-होते सोसायटी मातम में बदल चुकी थी।
कमरे में मिली डायरी, आठ पन्नों में लिखा दर्द
पुलिस जब फ्लैट में पहुंची तो बच्चियों का कमरा बंद था। अंदर एक पॉकेट डायरी मिली—जिसमें आठ पन्नों का सुसाइड नोट।इन पन्नों में कहीं गुस्सा था, कहीं डर, कहीं अकेलापन… और कहीं एक अलग ही दुनिया में जीने की चाह।पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों बहनें पिछले करीब दो साल से मोबाइल फोन, ऑनलाइन लव गेम और कोरियन कल्चर की गिरफ्त में थीं। वे खुद को भारतीय नहीं बल्कि कोरियन मानने लगी थीं। अपने नाम तक बदल लिए थे।
पिता की तीन शादियां, टूटा हुआ घर
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे परिवार की परतें खुलती गईं।पिता चेतन कुमार ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि उसने बीते 16 सालों में तीन शादियां की थीं।पहली शादी: सुजाता,दूसरी शादी: हिना (सुजाता की बहन),तीसरी शादी: टीना (कोर्ट मैरिज, 2021), तीनों बच्चियां पहली पत्नी से थीं। घर में रिश्तों की जटिलता, मांओं के बीच दूरी और पिता की लगातार बदलती जिंदगी—सब मिलकर बच्चों के मन पर गहरा असर डाल चुके थे।
पढ़ाई बनाम मोबाइल की जंग
तीसरी पत्नी टीना चाहती थी कि बच्चियां दोबारा पढ़ाई की ओर लौटें। उसी के कहने पर चेतन ने ट्यूशन लगवाया और मोबाइल फोन छीन लिए।यहीं से हालात बिगड़ते चले गए।ट्यूशन टीचर ने भी बताया कि तीनों लड़कियां खुद को कोरियन बताती थीं, भारतीय नाम से बुलाए जाने पर नाराज हो जाती थीं। मोबाइल छिनने और सख्ती के बाद बच्चियां अंदर ही अंदर टूटने लगीं।
मानसिक दबाव, कोई काउंसलिंग नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चियों की हालत देखकर भी किसी तरह की काउंसलिंग या मनोवैज्ञानिक मदद नहीं ली गई।घर में डांट, रोक-टोक और नियंत्रण बढ़ता गया—लेकिन संवाद खत्म हो गया।और उसी खामोशी में तीनों ने मौत का रास्ता चुन लिया।
माएं बेसुध, सोसायटी में डर
हादसे के बाद पहली और दूसरी पत्नी की हालत बेहद खराब है। वे बार-बार यही कहती हैं—“कोरियन ने मेरी बच्ची को मार डाला…”सोसायटी के लोग सहमे हुए हैं। पार्क में अब भी खून के निशान दिखाई देते हैं। बच्चे बाहर खेलने से डर रहे हैं।AOA ने परिवार के फ्लैट खाली कराने को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
सिस्टम के लिए चेतावनी
यह मामला सिर्फ आत्महत्या नहीं है। यह एक चेतावनी है— माता-पिता के लिए ,सिस्टम के लिए और उस डिजिटल दुनिया के लिए, जहां बच्चे अकेले छोड़ दिए जाते हैं मोबाइल, गेम और सोशल मीडिया अगर बिना निगरानी के बच्चों के हाथ में चले जाएं—तो अंजाम जानलेवा हो सकता है।
सवाल जो बाकी हैं
क्या स्कूल और प्रशासन ने समय रहते ध्यान दिया?
क्या परिवार ने बच्चों की मानसिक हालत को गंभीरता से लिया?
क्या ऑनलाइन कंटेंट पर कोई निगरानी है?
इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं…
लेकिन तीन बहनों की मौत ने समाज को आईना जरूर दिखा दिया है।
