एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।   इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जातीय रैलियों पर रोक लगाने के लिए जारी आदेशों और संबंधित नियम-कानूनों का सख्त व प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शासन के आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका वास्तविक रूप से पालन कराया जाए।

वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका को निस्तारित

कोर्ट ने इस दौरान समाज में बढ़ती जातीयता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार डालना जातीयता की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। इसी निर्देश के साथ कोर्ट ने राजनीतिक जातीय रैलियों पर रोक से जुड़ी वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।

2013 की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला

यह फैसला न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनाया।याचिका में मांग की गई थी कि उत्तर प्रदेश में जातीय रैलियों पर सख्त रोक लगाई जाए, क्योंकि चुनाव के समय इस तरह की रैलियां समाज में विभाजन और वैमनस्यता बढ़ाती हैं।

याची का तर्क: चुनावों से पहले अंधाधुंध जातीय रैलियां बढ़ाती हैं तनाव

याची अधिवक्ता मोतीलाल यादव का कहना था कि वर्ष 2013 में आगामी चुनावों को देखते हुए प्रदेश में अंधाधुंध जातीय रैलियां आयोजित की जा रही थीं। इससे समाज में तनाव और जातीय आधार पर द्वेष बढ़ रहा था। ऐसे में चुनाव से पहले इन रैलियों पर रोक लगाना जरूरी है।

सरकार के आदेशों का कड़ाई से पालन जरूरी: कोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने इस दिशा में आदेश जारी किए हैं, इसलिए अब आवश्यकता है कि इन आदेशों और कानूनों का कड़ाई से पालन कराया जाए। कोर्ट ने शासनादेश को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश देकर याचिका को निस्तारित कर दिया।

पहले भी हाईकोर्ट दे चुका है सख्त टिप्पणी

फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले वर्ष हाईकोर्ट की एक अन्य एकल पीठ ने जातीय महिमा मंडन को संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन बताया था।साथ ही अदालत ने आपराधिक मामलों के दस्तावेजों में जाति लिखे जाने पर भी कड़ा ऐतराज जताया था। इसी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सितंबर 2025 में आदेश जारी कर यह निर्देश दिया था कि सरकारी/कानूनी दस्तावेजों में जातीयता दर्ज न की जाए।अब हाईकोर्ट ने उसी शासनादेश के सख्त और प्रभावी पालन पर जोर दिया है।

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