एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । राज्य कर्मचारियों द्वारा चल-अचल संपत्ति का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड न करने के मामले में शासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जो कर्मचारी 31 जनवरी तक संपत्ति का ब्योरा नहीं देंगे, उनका जनवरी माह का वेतन रोका जाएगा। इतना ही नहीं, यदि किसी कर्मचारी को विवरण न देने के बावजूद वेतन जारी कर दिया गया तो आहरण वितरण अधिकारी (DDO) की जिम्मेदारी तय करते हुए उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश में कहा

मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि राज्यकर्मियों को 31 जनवरी तक संपत्ति विवरण अपलोड करना अनिवार्य किया गया था। साथ ही निर्देश दिए गए थे कि जनवरी माह का वेतन फरवरी में केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिले, जिन्होंने संपत्ति का विवरण दे दिया है।

47,816 कर्मचारियों ने नहीं दिया संपत्ति विवरण

निर्धारित तिथि तक प्रदेश में कुल 47,816 कर्मचारी और अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया है। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि यदि सूचना अपलोड न होने के बावजूद किसी कार्मिक को वेतन दे दिया गया है तो संबंधित DDO पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही एक सप्ताह के भीतर शासन को पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रदेश में कुल 8,65,390 राज्य कर्मचारी व अधिकारी हैं। इनमें संपत्ति विवरण न देने वालों में—

क्लास-1: 2,228

क्लास-2: 5,688

क्लास-3: 24,665

चतुर्थ श्रेणी: 15,235

पुलिस बल ने दिखाया अनुशासन, 98% से ज्यादा ने दिया विवरण

शासन के निर्देश के बाद पुलिस विभाग ने अनुशासन का परिचय दिया है। प्रदेश में 98 प्रतिशत से अधिक पुलिसकर्मियों ने संपत्ति विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड कर दिया है। जिन करीब 2 प्रतिशत पुलिसकर्मियों ने विवरण नहीं दिया, उनमें अधिकांश लंबी छुट्टी पर, अनुपस्थित या निलंबित कर्मी बताए जा रहे हैं। ऐसे कर्मियों का वेतन भी जारी नहीं किया गया है। शासन का कहना है कि बीते वर्ष भी 98% पुलिसकर्मियों ने संपत्ति का विवरण दिया था, जिसे तकनीकी सेवा शाखा ने पोर्टल पर अपलोड कराया था।

वेतन भुगतान को लेकर मदरसा मिनी आईटीआई कर्मियों का प्रदर्शन

दूसरी ओर, मदरसा शिक्षा परिषद की मिनी आईटीआई में कार्यरत प्रशिक्षकों और कर्मचारियों ने 6 महीने से वेतन न मिलने के विरोध में सोमवार को अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निदेशक द्वारा “मानक पूरा न होने” का बहाना बनाकर 58 मिनी आईटीआई केंद्रों का बजट रोका गया, जिससे कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

सभी केंद्रों का बजट रोकना गलत

मदरसा मिनी आईटीआई स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की महासचिव सूफिया बानो ने कहा कि अगर कुछ सेंटर मानक पूरे नहीं कर रहे हैं तो सभी केंद्रों का बजट रोकना गलत है। बाराबंकी से आए नबीउल्लाह ने कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया डीएम की अध्यक्षता वाली समिति करती है, ऐसे में कर्मचारियों को दोषी ठहराना उचित नहीं। संगठन के अध्यक्ष मोतीउल्लाह फौजी ने निदेशक पर मनमानी का आरोप लगाते हुए बजट जारी कर वेतन भुगतान की मांग की।

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