अमेठी। माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ी घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे संदेहों के बीच अब उनकी सुरक्षा को लेकर अमेठी से खुली पहल सामने आई है। कांग्रेस के पूर्व विधान परिषद सदस्य दीपक सिंह ने शंकराचार्य से सीधे फोन पर बातचीत कर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा

पूर्व एमएलसी दीपक सिंह ने बताया कि बातचीत के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह सुंदर्शन चक्र धारी के भरोसे कथित सरकारी अन्याय के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। दीपक सिंह के अनुसार, उन्होंने पहले ही प्रशासन को भेजे गए पत्र में शिविर क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों, आधी रात में रेकी और साधु-संतों पर लाठीचार्ज जैसी घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।

शंकराचार्य के साथ समर्थकों के काफिले के रवाना होने की योजना

इन्हीं हालातों के मद्देनज़र 28 जनवरी को अमेठी से प्रयागराज संगम तट के लिए शंकराचार्य के साथ समर्थकों के काफिले के रवाना होने की योजना बनाई गई है। इस दौरान 150 समर्थक शंकराचार्य के साथ रहेंगे और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ शिविर की निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे। सुरक्षा को तीन चरणों में बांटा गया है, जहां 50-50 समर्थकों की तीन टीमें आठ-आठ घंटे की पालियों में तैनात रहेंगी।इस पूरी व्यवस्था से यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि जब माघ मेले जैसे संवेदनशील आयोजन में एक प्रमुख धर्माचार्य को स्वयंसेवकों के सहारे सुरक्षा इंतजाम करने पड़ रहे हैं, तो सरकारी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और जिम्मेदारी कहां है। क्या संतों की सुरक्षा अब प्रशासनिक प्राथमिकता नहीं रही—यह प्रश्न अब सार्वजनिक बहस का विषय बनता जा रहा है।

माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

दीपक सिंह ने साफ कहा कि यह कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है, बल्कि सनातन परंपरा के एक प्रमुख स्तंभ की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मजबूरी है। उन्होंने कहा कि समर्थकों को अनुशासन और संयम के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो।फिलहाल यह पहल न केवल शंकराचार्य की सुरक्षा से जुड़ा विषय बन गई है, बल्कि माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है और क्या शंकराचार्य की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

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