नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय प्रगति का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया गया। परेड का नेतृत्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सलामी मंच पर मौजूद रहे।
‘लास्ट पोस्ट’ की धुन के साथ दो मिनट का मौन रखा गया
समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक आगमन के साथ हुई। यहां उन्होंने मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित किया। इसके बाद ‘लास्ट पोस्ट’ की धुन के साथ दो मिनट का मौन रखा गया।राष्ट्रपति भवन से लेकर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तक फैले कर्तव्य पथ को इस वर्ष ‘विविधता में एकता’ थीम पर सजाया गया था। इस दौरान 100 सांस्कृतिक कलाकारों ने परेड की शुरुआत की और 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा करते हुए राष्ट्रीय ध्वज का नेतृत्व किया।
राष्ट्रपति के सलामी लेने के बाद परेड शुरू
राष्ट्रपति के सलामी लेने के बाद परेड शुरू हुई, जिसका संचालन लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने किया। परेड में भारतीय सेना की नई पीढ़ी के हथियार, हेलीकॉप्टर, वायु सेना और नौसेना की टुकड़ियाँ, तथा विभिन्न राज्यों और केंद्रीय बलों की झांकियाँ शामिल थीं।कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष और भारत की अभूतपूर्व प्रगति का भी प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। परेड ने देशवासियों को गर्व का अनुभव कराया और भारतीय संविधान, सेना और सांस्कृतिक विविधता की महानता को प्रदर्शित किया।
