नई दिल्ली। आज पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस मनाकर संविधान और लोकतंत्र का जश्न मना रहा है। 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस इसलिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले भी 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था।
18 साल तक मनाया गया स्वतंत्रता दिवस
आजादी से पहले 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाता था। दिसंबर 1929 में लाहौर में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव के अनुसार, अगर ब्रिटिश हुकूमत 26 जनवरी 1930 तक भारत को पूर्ण स्वराज नहीं देती, तो देश अपने आप को स्वतंत्र घोषित करेगा। इस वजह से कांग्रेस ने 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में घोषित किया।
1930 में पहली बार मनाया गया स्वतंत्रता दिवस
26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इस दिन जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा फहराया था। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया। लेकिन 26 जनवरी 1930 की ऐतिहासिकता को याद रखते हुए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया और इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।
गणतंत्र दिवस का कारण
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने के बाद संविधान सभा का गठन हुआ। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने 2 साल 11 महीने और 18 दिनों में संविधान का मसौदा तैयार किया। नवंबर 1949 में संविधान सभा ने इसे स्वीकार कर लिया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। तब से हर साल 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं।इस दिन का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह पहले से ही राष्ट्रीय गौरव और स्वराज की स्मृति से जुड़ा हुआ था। इस तरह 26 जनवरी हमें हमारी स्वतंत्रता, संविधान और लोकतंत्र की याद दिलाता है।
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