संजीव सिंह, बलिया । जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। वर्ष 2016 से 2024 के बीच योजना के तहत सैकड़ों ऐसे लोगों को सरकारी धन का भुगतान कर दिया गया, जो इसके लिए पात्र ही नहीं थे। हैरानी की बात यह है कि दर्जनों मृत व्यक्तियों के नाम पर भी आवास स्वीकृत कर दिए गए।

27 ऐसे नाम भी सूची में पाए गए जिनकी पहले ही मृत्यु हो चुकी

जनपद स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, बिना समुचित सत्यापन के 250 अपात्र लाभार्थियों को योजना की किस्तें जारी कर दी गईं, जबकि 27 ऐसे नाम भी सूची में पाए गए जिनकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है। इस खुलासे के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी अधिकारियों के वेतन से रिकवरी के आदेश दिए हैं।

कुल 623 पीएम आवासों का लक्ष्य निर्धारित था

डीएम की समीक्षा में यह भी सामने आया कि जिले में कुल 623 पीएम आवासों का लक्ष्य निर्धारित था, लेकिन कई विकासखंडों में अब तक निर्माण अधूरा है। गड़वार, सोहांव, रेवती और चिलकहर विकासखंडों में दर्जनों आवास अभी तक पूरे नहीं हो सके हैं। वहीं, 80 आवास भूमि विवाद और 31 मामले न्यायालय में लंबित होने के कारण अटके हुए हैं।जिलाधिकारी ने सभी 623 आवासों का दोबारा सत्यापन कराने और लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर से अपात्रों को भुगतान हुआ है, उनसे वसूली की जाएगी और आगे किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आवास प्लस सर्वे को लेकर निर्देश दिए गए

इसके साथ ही डीएम ने मनरेगा के तहत आवास लाभार्थियों को दी जाने वाली मजदूरी की स्थिति की भी समीक्षा की। आवास प्लस सर्वे को लेकर निर्देश दिए गए कि पात्र और अपात्र व्यक्तियों की सूची ग्राम पंचायतों में खुली बैठकों के माध्यम से सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाई जाए, ताकि योजना में पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार का संदेह न रहे।

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