एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल–2025 के विरोध में उत्तर प्रदेश में आंदोलन और तेज होने जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऐलान किया है कि राज्य में किसान संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों को साथ लेकर एक वृहत संयुक्त मोर्चा बनाया जाएगा। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता और बिजली कर्मचारियों पर की गई कथित उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त नहीं होतीं।

बिजली कर्मचारियों को एक मंच पर लाने की तैयारी

संघर्ष समिति के अनुसार, केंद्रीय स्तर पर किसान संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस बात पर आम सहमति बनी है कि बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल–2025 का संयुक्त रूप से विरोध किया जाएगा। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भी किसान संगठनों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और बिजली कर्मचारियों को एक मंच पर लाने की तैयारी की जा रही है।समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में शीघ्र ही केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रदेश पदाधिकारियों और उत्तर प्रदेश के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।

आंदोलन के संयुक्त कार्यक्रम और रणनीति तय की जाएगी

इस बैठक के बाद आंदोलन के संयुक्त कार्यक्रम और रणनीति तय की जाएगी।संघर्ष समिति ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी पिछले एक वर्ष से अधिक समय से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। अब इस आंदोलन को और व्यापक स्वरूप देते हुए किसानों और श्रमिक संगठनों को भी सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा।बिजली कर्मचारियों का आरोप है कि निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की जा रही हैं। साथ ही, जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिसका विरोध न केवल कर्मचारी बल्कि किसान और आम उपभोक्ता भी कर रहे हैं। इन मुद्दों को लेकर प्रदेश भर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा।

बिजली महापंचायतों और रैलियों का आयोजन किया जाएगा

इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिजली पंचायतों, बिजली महापंचायतों और रैलियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि किसानों, उपभोक्ताओं और आम जनता को निजीकरण और स्मार्ट मीटर से जुड़े कथित दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जा सके।संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि किसान संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ यह सहमति बनी है कि जब तक निजीकरण का निर्णय पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता और आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई सभी दमनात्मक कार्यवाहियां समाप्त नहीं की जातीं, तब तक आंदोलन लगातार और निर्णायक रूप से जारी रहेगा।

आंदोलन बुधवार को 384वें दिन में प्रवेश कर गया

उल्लेखनीय है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहा यह आंदोलन बुधवार को 384वें दिन में प्रवेश कर गया। इस अवसर पर प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन कर सरकार के फैसले के खिलाफ अपना आक्रोश जताया।प्रेस विज्ञप्ति पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेन्द्र दुबे के हस्ताक्षर हैं।

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