एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।उत्तर प्रदेश शासन ने समाज कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए 4 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में कटौती का निर्णय लिया गया है। यह कार्रवाई पिछले डेढ़ दशक से लंबित रहे मामलों की जांच के बाद की गई है।
सीम अरुण की निगरानी में इन मामलों की जांच की गई
समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की निगरानी में इन मामलों की जांच की गई। कार्रवाई मुख्य रूप से श्रावस्ती, मथुरा, शाहजहांपुर और औरैया जिलों में हुए छात्रवृत्ति और पेंशन घोटालों पर की गई है। विभाग ने सभी मामलों में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं।श्रावस्ती में तैनात मीना श्रीवास्तव पर मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना, शादी-बिमारी योजना और छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति में खाता संख्या और डाटा में हेरफेर करने का आरोप है। इसके चलते उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
छात्र-छात्राओं के धनराशि का किया गबन
मथुरा में तैनात करुणेश त्रिपाठी ने निजी प्राइवेट आईटीआई संस्थानों को अनियमित छात्रवृत्ति भुगतान किया। इसमें 11 मान्यताविहीन संस्थानों को 2.53 करोड़ रुपये दिए गए। उनके द्वारा दो वर्ष से 51 वर्ष तक की आयु के छात्रों को पाठ्यक्रम में दाखिला दिलाकर धनराशि का दुरुपयोग किया गया। विभाग उनसे 19.25 करोड़ रुपये वसूल करेगा।हापुड़ में तैनात संजय कुमार ब्यास को भी सेवा से बर्खास्त कर 3.23 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया गया। उन्होंने छात्रवृत्ति अभिलेखों में कूट-रचना कर छात्र-छात्राओं के धनराशि का गबन किया।
बर्खास्त कर 2.52 करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी
शाहजहांपुर में तैनात राजेश कुमार को भी बर्खास्त कर 2.52 करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में लाभार्थियों के बैंक खाते बदलकर अपात्रों को लाभ पहुंचाया।औरैया में तैनात सेवानिवृत्त अधिकारी श्रीभगवान पर 251 लाभार्थियों के खाते बदलकर पेंशन गबन करने का दोष पाया गया। उनसे 20 लाख रुपये वसूले जाएंगे और उनकी पेंशन में 10 प्रतिशत स्थाई कटौती की जाएगी।
योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही
मथुरा में तैनात तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी विनोद शंकर तिवारी और उमा शंकर शर्मा को भी छात्रवृत्ति घोटाले में दोषी पाया गया। दोनों की पेंशन में 50 प्रतिशत स्थाई कटौती के साथ क्रमशः 1.96 करोड़ और 88,94,040 रुपये वसूली के आदेश दिए गए हैं।राज्यमंत्री असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। यह कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी और जो मामले अभी दबे हुए हैं, उनमें भी शीघ्र एफआईआर दर्ज की जाएगी।
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