एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय, गोमतीनगर विस्तार में मंगलवार को तीन वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों विक्रमजीत सिंह सियाल, हरभजन सिंह और ज्ञान सिंहके निधन पर शोकसभा आयोजित की गई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण की अध्यक्षता में हुई इस सभा में मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस कर्मियों और कर्मचारियों ने मौन रखकर दिवंगत अधिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

डीजीपी ने दिए तीनों अधिकारियों के जीवन परिचय

शोकसभा में डीजीपी ने तीनों पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी सेवाओं के दौरान पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता से कार्य करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को गौरवान्वित किया। डीजीपी राजीव कृष्ण ने सबसे पहले पूर्व पुलिस महानिदेशक विक्रमजीत सिंह सियाल को याद किया। उन्होंने बताया कि सियाल जी वर्ष 1959 बैच के आईपीएस अधिकारी थे, जिन्होंने पुलिस महानिदेशक, एनएसजी के पद से वर्ष 1993 में सेवानिवृत्ति ली थी। अपने 34 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान दिया।

सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक हरभजन सिंह को श्रद्धांजलि दी गई

उन्हें 1978 में दीर्घ एवं सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक तथा 1986 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।इसके बाद सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक हरभजन सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। 1976 बैच के अधिकारी हरभजन सिंह जी ने कई जनपदों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और विभिन्न जोनों में पुलिस महानिरीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वे 2005 में मेरठ जोन से सेवानिवृत्त हुए थे। वर्ष 1999 में उन्हें दीर्घ एवं सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक प्रदान किया गया था।

सेवानिवृत्त पुलिस उपमहानिरीक्षक ज्ञान सिंह को याद किया

अंत में सेवानिवृत्त पुलिस उपमहानिरीक्षक ज्ञान सिंह को याद किया गया। 1980 में प्रांतीय पुलिस सेवा में चयनित होकर बाद में आईपीएस में प्रोन्नत हुए ज्ञान सिंह ने बस्ती, लखनऊ, मुरादाबाद और अन्य जनपदों में महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।

दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति को प्रार्थना की गई

उन्हें 2011 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दीर्घ एवं सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक मिला था।शोकसभा में मौजूद अधिकारियों ने तीनों दिवंगत अधिकारियों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और उनके योगदान को उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय बताया।सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

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