एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के एक प्रोफेसर पर उनकी ही शोध छात्रा ने शादी का झांसा देकर दो साल तक शारीरिक शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामला सामने आने के बाद न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है, बल्कि राजभवन ने भी इस पूरे प्रकरण पर विश्वविद्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

पुलिस ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा

पीड़िता की तहरीर पर थाना न्यू आगरा पुलिस ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। एफआईआर में दुष्कर्म, मारपीट और धमकी देने की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने सोमवार को छात्रा के बयान दर्ज किए और मेडिकल परीक्षण भी कराया। छात्रा ने अपने मोबाइल से चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत पुलिस को सौंपे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

शादी का झांसा देकर दो साल तक किया शोषण

पीड़ित शोध छात्रा ने अपनी शिकायत में बताया है कि वह विश्वविद्यालय के बेसिक साइंस विभाग में कैमिस्ट्री की पीएचडी कर रही है। इसी दौरान उसकी मुलाकात प्रोफेसर गौतम जैसवार से हुई, जो उसके को-सुपरवाइजर थे। प्रोफेसर ने उसे गाइड करने के बहाने संपर्क बढ़ाया और फिर शादी का झांसा देकर करीब दो वर्षों तक शारीरिक शोषण करता रहा।

छात्रा का आरोप , शादी की बात प्रोफेसर ने छिपाई

छात्रा का कहना है कि प्रोफेसर पहले से शादीशुदा हैं, लेकिन उन्होंने यह बात छिपाई और झूठे वादे करते रहे। आरोप है कि वह हर रविवार को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक उसे अपने ऑफिस बुलाते थे। हाल ही में 25 अक्तूबर को भी बुलाकर हाथापाई की और धमकी दी कि अगर उसने शिकायत की तो उसकी पीएचडी रोक दी जाएगी।

खुजराहो व मथुरा के होटल में बनाए शारीरिक संबंध

छात्रा ने यह भी बताया कि प्रोफेसर उसे आगरा से बाहर भी ले गए थे। आरोप है कि मध्य प्रदेश के खजुराहो और मथुरा के एक होटल में भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए। जब छात्रा ने शादी की बात कही तो आरोपी ने मुकरते हुए धमकाना शुरू कर दिया।

पुलिस ने तेज की जांच, आरोपी के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे

न्यू आगरा थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद केस दर्ज किया गया है और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। छात्रा के बयान दर्ज किए गए हैं, जबकि अन्य गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। एसीपी हरीपर्वत अक्षय संजय महाडिक ने बताया कि मामले में भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने की आंतरिक जांच समिति गठित

मामला सार्वजनिक होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन सक्रिय हो गया। कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने कहा कि यह प्रकरण बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) गठित कर दी गई है, जिसमें महिला अधिवक्ता समेत विषय विशेषज्ञ सदस्य शामिल हैं।

दोषी मिले तो सेवा समाप्ति की जाएगी कार्रवाई

कुलपति ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी तरह से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों और कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 (PoSH Act, 2013) के तहत की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में प्रोफेसर दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ निलंबन से लेकर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जाएगी।

राजभवन ने भी मांगी रिपोर्ट

इस प्रकरण की जानकारी उच्च स्तर तक पहुंच गई है। राजभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल कार्यालय ने विवि से यह भी पूछा है कि महिला शिकायतों के निस्तारण के लिए आंतरिक समिति की कार्यप्रणाली क्या रही है और इस प्रकरण में तत्काल क्या कदम उठाए गए हैं।पुलिस और विवि दोनों स्तरों पर जांच जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन भी रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। फिलहाल पीड़िता सुरक्षा में है और आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

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