एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ।राजधानी के अमीनाबाद की संकरी गलियों में आज मातम पसरा है। यहां के एक परिवार पर ऐसा गम टूट पड़ा है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। राजस्थान के कोटा में खाटू श्याम दर्शन के दौरान हुए सड़क हादसे में जया शर्मा (20) की मौत ने विनोद कुमार और मंजू देवी के जीवन को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। यह तीसरी संतान है, जिसे उन्होंने सड़क हादसे में खोया है।इस परिवार की चीखों में अब केवल एक सवाल गूंज रहा है क्या हमारी औलादें इसी सड़क की भेंट चढ़ती रहेंगी?”

एक हादसे ने फिर से वही ज़ख्म ताजा कर दिया

जया शर्मा, जो ग्रेजुएशन के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी, अपने भाई अभिषेक और बहन सोनाली की मौत के बाद मां-पिता की ढांढस बनकर रह गई थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। एक हादसे ने फिर से वही ज़ख्म ताजा कर दिए, जिनसे यह परिवार कभी उबर ही नहीं पाया।पिता विनोद कुमार ने रुंधे गले से कहा—”पहले बेटी को कंधा दिया, फिर बेटे को… अब तीसरी औलाद की अर्थी उठाने की हिम्मत नहीं बची।”

यह रहा पूरा घटनाक्रम

पिछले रविवार को जब जया ने मां मंजू से कहा कि वह खाटू श्याम के दर्शन को दोस्तों के साथ जा रही है, तब किसी को क्या पता था कि ये उसकी आखिरी यात्रा होगी। वह लखनऊ के नमन चतुर्वेदी, दिल्ली के राहुल प्रकाश और गोरखपुर की अंशिका मिश्रा के साथ कार में सवार थी। हादसा गजनपुरा के पास एक गड्ढा बचाने के प्रयास में हुआ, जब उनकी कार अनियंत्रित होकर पिकअप में जा घुसी। तीन की मौके पर ही मौत हो गई और जया ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

काश, हमने उसे जाने से रोक लिया होता…

यह वही सड़क थी, जो पहले भी उनके दो बच्चों की जान ले चुकी थी — सोनाली की 2014 में और अभिषेक की 2022 में। अब तीसरी बार इस मौत की सड़क ने उनकी जया को भी उनसे छीन लिया।पड़ोसियों के मुताबिक, जया के पिता विनोद अमीनाबाद में कॉस्मेटिक की छोटी-सी दुकान चलाते हैं। अब वे गुमसुम हैं। घर का सूनापन और बच्चों की तस्वीरें उन्हें हर पल चुभ रही हैं। मां मंजू तो बस एक ही बात दोहराती जा रही हैं—”काश, हमने उसे जाने से रोक लिया होता…”

बुझ गया घर का इकलौता चिराग

राजस्थान में सड़क हादसे में जया के अलावा नमन की भी मौत हुई है। शिवाजी मार्ग अमीनाबाद निवासी नमन के पिता राम कुमार चतुर्वेदी एलडीए से बाबू पद से सेवानिवृत्त हुए है। नमन इनका इकलौता बेटा था, जाे कैंटीन चलाता था। नमन की मां ने उसे कई बार जाने से रोका लेकिन माना नहीं और गाड़ी निकालकर चल गया। अब नमन की मां रो- रोकर यह कह रही है कि खास उसकी बात मान लिय होता तो उन्हें आज यह दिन न देखना पड़ता। परिजन शव लेने रविवार को ही राजस्थान के लिए निकल दिये है।

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