एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ।पुलिस महानिदेशक यूपी राजीवी कृष्ण द्वारा नवनियुक्त आरक्षियों के गुणवत्ता पूर्ण प्रशिक्षण एवं उनको मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के दृष्टिगत कमिश्नरेट वाराणसी, जनपद सुल्तानपुर और अमेठी की रिजर्व पुलिस लाइन एवं पीटीसी में चल रहे जेटीसी (Joining Training Course)का निरीक्षण किया गया।

सर्वांगीण विकास के लिए प्रशिक्षण दिए जाने पर दिया जोर

मंगलवार को पुलिस महानिदेशक यूपी द्वारा नवनियुक्त आरक्षियों के चल रहे ज्वाइनिंग ट्रेनिंग कोर्स (JTC) के दृष्टिगत कमिश्नरेट वाराणसी, जनपद सुल्तानपुर और अमेठी की रिजर्व पुलिस लाइन एवं पीटीसी का भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पुलिस महानिदेशक द्वारा प्रशिक्षण से जुड़े सभी अधिकारियों को पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षुओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

वरिष्ठ अधिकारी प्रशिक्षुओं को अपने अनुभव का लाभ दें

नवनियुक्त आरक्षियों की अगले 30-40 वर्षों तक उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए ही नही बल्कि समाज के भविष्य में निर्णायक भूमिका होगी। अतः आवश्यक है कि प्रशिक्षण से जुड़े सभी अधिकारी पूर्ण मनोयोग से उनके सर्वांगीण प्रशिक्षण में रूचि लें एवं वरिष्ठ अधिकारी प्रशिक्षुओं को अपने अनुभव का लाभ दें।प्रशिक्षण का एक ऐसा उत्कृष्ट मानक स्थापित करें, जिससे उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए यह प्रशिक्षण एक परिवर्तनकारी कारक सिद्ध हो।

पुलिस को नया रूप देने का अधिकारियों के पास अच्छा मौका

डीजीपी ने कहा कि लगभग 60 हजार रिक्रूट आरक्षी अगले 30 से 40 वर्ष तक काम करेंगे, इनके क्वालिटी ऑफ ट्रेनिंग का इनके काम पर प्रभाव पड़ेगा ।पुलिस को नया रूप देने का अधिकारियों के पास अच्छा मौका है। जब ये नए रिक्रूट आरक्षी थानों पर पहुँचेगें तो एक सकारात्मक बदलाव लायेंगे तथा एक नई दिशा प्रदान करने का कार्य करेगें। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग कराना एक चुनौती है जिसे हम पूरी दक्षता से निभाएंगे और पुलिस तथा समाज को नई दिशा देने वाले नए रंग भरकर इन्हें आगे भेजेंगे।

प्रशिक्षण में पुलिस अधिकारी अधिक से अधिक करें प्रतिभाग

डीजीपी ने निर्देश दिया कि जिले के पुलिस अधिकारी भी प्रशिक्षण देने में अधिक से अधिक प्रतिभाग करें। प्रदेश में क्लासरूम ट्रेनिंग में एकरूपता के लिए डिजिटल स्टडी मटेरियल तैयार किए गए हैं, जिनसे डिजिटली क्लासेज चलेंगी। ट्रेनिंग एक कमाण्ड फंक्शन है इन रिक्रूट आरक्षियों की ट्रेनिंग समाज व पुलिस की जरूरत के अनुसार करायी जायेगी। सभी वरिष्ठ अधिकारीगण सिलेबस तथा अपने अनुभव के सम्मिश्रण से अपना खुद का कन्टेंट तैयार करे तथा स्वयं क्लास लेकर प्रशिक्षण में योगदान दे। अच्छे प्रशिक्षक की वीडियो रिकार्डिंग कराकर उसे अन्य ट्रेनिंग सेन्टर पर भेजा जाए।

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