एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चलाई जा रही साइबर जागरूकता पहल के दृष्टिगत पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण के निर्देशन में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा तकनीक आधारित जन-जागरूकता अभियान निरंतर संचालित किए जा रहे हैं। यूपी पुलिस के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण है कि पुलिस अधीक्षक श्रावस्ती घनश्याम चौरसिया को कैपिटल मीडिया ग्रुप, लंदन द्वारा आयोजित “पोलारिस लीडरशिप समिट 2025” में “सिल्वर पोलारिस अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान “एंटी-डिसइन्फॉर्मेशन” श्रेणी में श्रावस्ती पुलिस द्वारा चलाए गए जन-जागरूकता अभियान “Shrawasti’s 2024 Deepfake Detection Campaign”के लिए प्रदान किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रावस्ती पुलिस द्वारा प्राप्त किया गया यह पहला अवॉर्ड
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रावस्ती पुलिस द्वारा प्राप्त किया गया यह पहला अवॉर्ड है, जो AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की यूपी पुलिस की पहल को वैश्विक मंच पर मान्यता देने का प्रतीक है ।पुलिस अधीक्षक श्रावस्ती के नेतृत्व में नोएडा स्थित संस्था “नेतृत्वशाला” एवं “इंक्लूसिव एआई” जैसे संस्थानों के सहयोग से वर्ष 2024 में यह अभियान चलाया गया । यह देश का पहला जिला-स्तरीय डीपफेक अवेयरनेस प्रोग्राम था, जिसके माध्यम से आम नागरिकों, विद्यार्थियों, पुलिसकर्मियों तथा जनप्रतिनिधियों को को डीपफेक तकनीक की पहचान और सुरक्षा उपायों से अवगत कराया गया । श्रावस्ती पुलिस के द्वारा चलाए गए उक्त जन-जागरूकता अभियान के लिए कैपिटल मीडिया ग्रुप, लंदन द्वारा यह अवॉर्ड प्रदान किया गया है ।
मैनेजिंग डायरेक्टर द्वारा श्रीवास्ती पुलिस को भेजे गए प्रशस्ति पत्र
कैपिटल मीडिया ग्रुप, लंदन की मैनेजिंग डायरेक्टर नाज़ली सेलिन ओज़कान द्वारा श्रावस्ती पुलिस को भेजे गए प्रशस्ति पत्र में उल्लिखित किया गया है कि आपके नेतृत्व में एशिया के एक छोटे जिले ने वैश्विक स्तर पर एक मिसाल कायम की है। आपने ‘AI for Good’ की अवधारणा को यथार्थ में बदला है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा डीपफेक के विरुद्ध आपका यह अग्रणी कार्य चुनावी पारदर्शिता के लिए एक वैश्विक मानक बन चुका है।” यह अवॉर्ड इस बात का प्रमाण है कि तकनीक के माध्यम से समाज में सुरक्षा, विश्वास और पारदर्शिता लाने की दिशा में यूपी पुलिस अग्रणी भूमिका निभा रही है।
क्या है डीपफेक
डीपफेक (Deepfake) एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक है, जिसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति की आवाज़, चेहरा या हाव-भाव को बदलकर नकली वीडियो, ऑडियो या फोटो बनाने के लिए किया जाता है — जो देखने में एकदम असली लगते हैं।डीपफेक तकनीक से ऐसा वीडियो बनाया जा सकता है जिसमें कोई व्यक्ति ऐसा बोलता या करता दिखे, जो उसने असल में कभी किया ही नहीं। यह तकनीक आमतौर पर “डीप लर्निंग” और फेस स्वैपिंग के जरिए काम करती है। ऐसे में साइबर अपराध करने की ज्यादा संभावना होती है, इसी को लेकर श्रावस्ती में लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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