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यूपी में भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: रिश्वत लेते लेखपाल, मुंशी और दरोगा गिरफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) ने मंगलवार को दो अलग-अलग जिलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लेखपाल, उसके निजी मुंशी और एक उपनिरीक्षक (दरोगा) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

कार्रवाई के बाद संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है।पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचार निवारण संगठन की बांदा और गोंडा इकाइयों ने यह कार्रवाई की।

चित्रकूट में लेखपाल और मुंशी ट्रैप

भ्रष्टाचार निवारण संगठन की बांदा इकाई को चित्रकूट निवासी सत्यप्रकाश सिंह ने शिकायत दी थी कि उनकी भूमि से संबंधित मामले में धारा 82 के तहत आबादी श्रेणी की भूमि को निरस्त कर कृषि भूमि में परिवर्तन कराने के लिए रिश्वत मांगी जा रही है।शिकायत की जांच के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया।

निरीक्षक राम आसरे त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम ने चित्रकूट के मैकी मोड़ तिराहा, प्रयागराज रोड पर कार्रवाई करते हुए लेखपाल रविशंकर द्विवेदी और उसके निजी मुंशी लवलेश कुमार पाण्डेय को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

बहराइच में दरोगा भी चढ़ा एंटी करप्शन के हत्थे

दूसरी कार्रवाई में भ्रष्टाचार निवारण संगठन की गोंडा इकाई ने बहराइच जिले के रिसिया थाने में तैनात उपनिरीक्षक सुभाष चन्द्र चौहान को गिरफ्तार किया।शिकायतकर्ता राम हुकुम मौर्य ने आरोप लगाया था कि एक छेड़खानी के मामले में धाराएं बढ़ाकर जेल भेजने की धमकी देकर दरोगा उनसे रिश्वत मांग रहा था। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की और दरोगा को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी

भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पूरे प्रदेश में लगातार निगरानी रखी जा रही है। सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

ट्रैप कार्रवाई कर दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा

अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा रिश्वत मांगने या लेने की शिकायत मिलने पर आम नागरिक सीधे भ्रष्टाचार निवारण संगठन से संपर्क कर सकते हैं। ऐसे मामलों में साक्ष्यों के आधार पर ट्रैप कार्रवाई कर दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत गया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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