लखनऊ । ]राजधानी में निजी विद्यालयों की मनमानी फीस वसूली पर अब सख्ती होने जा रही है। नए नियमों के तहत स्कूल अब बिना जानकारी दिए फीस नहीं बढ़ा सकेंगे और उन्हें नए सत्र से पहले ही पूरी फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी।
जिला शुल्क नियामक समिति का गठन कर दिया
जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 के तहत जिला शुल्क नियामक समिति का गठन कर दिया है। यह समिति जिलाधिकारी की अध्यक्षता में काम करेगी और स्कूलों की फीस से जुड़े मामलों की निगरानी करेगी।
क्या होंगे नए नियम
स्कूलों को हर क्लास की फीस का पूरा विवरण कम से कम 60 दिन पहले अपनी वेबसाइट पर डालना होगा।
फीस का ब्योरा जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय को देना अनिवार्य होगा।
शैक्षणिक सत्र के दौरान फीस में बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।
फीस में अधिकतम 5% तक ही वृद्धि की अनुमति होगी।
फीस वार्षिक नहीं, बल्कि मासिक/त्रैमासिक/अर्धवार्षिक किस्तों में ही ली जाएगी।
यूनिफॉर्म और अन्य खर्च पर भी नियंत्रण
पांच साल के भीतर यूनिफॉर्म बदलने पर रोक रहेगी।
छात्रों को किसी खास दुकान से किताब, जूते या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
हर फीस भुगतान पर स्कूल को रसीद देना अनिवार्य होगा।
कैपिटेशन फीस (डोनेशन) पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
शिकायत और कार्रवाई
अगर किसी स्कूल के खिलाफ अभिभावक या छात्र शिकायत करते हैं, तो पहले स्कूल प्रशासन से संपर्क करना होगा। समाधान न मिलने पर मामला जिला शुल्क नियामक समिति के पास जाएगा।
नियमों का उल्लंघन करने पर—
पहली बार: ₹1 लाख जुर्माना
दूसरी बार: ₹5 लाख जुर्माना
तीसरी बार: स्कूल की मान्यता रद्द
सख्त निगरानी
जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सभी बोर्ड के स्कूलों (अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर) को इन नियमों का पालन करना होगा। समिति समय-समय पर जांच अभियान भी चलाएगी।
