लखनऊ । उत्तर प्रदेश में चल रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत गोरखपुर पुलिस ने त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ी और प्रभावशाली उपलब्धि हासिल की है। नाबालिग से दुष्कर्म के एक बेहद संवेदनशील मामले में प्रभावी पुलिस विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य और मजबूत अभियोजन पैरवी के चलते मात्र 16 कार्य दिवस में अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है।

शादी समारोह के दौरान बच्ची के साथ किया गया था दुष्कर्म

यह मामला थाना पीपीगंज क्षेत्र से जुड़ा है, जहां 20-21 फरवरी 2026 की रात एक शादी समारोह के दौरान 6 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की जघन्य घटना सामने आई थी। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की।पुलिस की त्वरित कार्रवाई में मुख्य अभियुक्त अशोक निषाद और सह-अभियुक्ता सुनीता देवी (मां) को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। प्रारंभिक जांच में ही पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया शुरू की, जिससे मामले की मजबूत नींव तैयार हुई।

तेज़ और सटीक जांच बनी केस की सबसे बड़ी ताकत

जांच टीम ने मात्र 5 दिनों के भीतर सभी आवश्यक साक्ष्य जुटाकर चार्जशीट तैयार की और उसे माननीय न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। पुलिस की इसी तेजी और सटीकता के चलते मामला तेजी से ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ा।इसके बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट-01, गोरखपुर ने मामले की सुनवाई को प्राथमिकता देते हुए गवाहों के बयान दर्ज किए और लगातार सुनवाई कर 16 कार्य दिवस के भीतर बहस पूरी कर ली।

अदालत का बड़ा फैसला

साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की मजबूत दलीलों के आधार पर अदालत ने मुख्य अभियुक्त अशोक निषाद को आजीवन कारावास और 55,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, साक्ष्य छिपाने के गंभीर आरोप में सह-अभियुक्ता सुनीता देवी को 4 वर्ष के कठोर कारावास और 5,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।

अभियोजन और पुलिस की मजबूत पैरवी

इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी राघवेंद्र राम त्रिपाठी और अरविंद्र कुमार श्रीवास्तव की प्रभावी और ठोस पैरवी को न्याय प्रक्रिया की सफलता का अहम कारण माना जा रहा है।

“ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत सख्त मॉनिटरिंग

राज्य में मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत चल रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” के अंतर्गत पुलिस महानिदेशक स्तर पर जघन्य अपराधों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर मामलों में दोषियों को कम से कम समय में अधिकतम सजा मिले और पीड़ितों को शीघ्र न्याय प्राप्त हो।

गोरखपुर पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि

इस मामले में पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना, समयबद्ध चार्जशीट और मजबूत न्यायिक पैरवी ने यह साबित किया है कि अगर जांच और अभियोजन दोनों मजबूत हों तो न्याय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है।यह फैसला न केवल गोरखपुर पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान की प्रभावशीलता का भी स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है।

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