बहराइच । जिले के रामनगर गांव की सुबह कभी इतनी खामोश नहीं रही थी। सोमवार को सूरज तो रोज की तरह उगा, लेकिन एक घर का उजाला हमेशा के लिए बुझ चुका था। आंगन में जहां कभी परिवार की हंसी गूंजती थी, वहां खून के धब्बे और बिखरी चप्पलें उस रात की भयावह कहानी कह रही थीं।
चार लोग बेरहमी से मौत के घाट उतार दिए गए
रविवार देर रात करीब डेढ़ बजे, एक ही परिवार के चार लोग बेरहमी से मौत के घाट उतार दिए गए—82 वर्षीय दादी शीतला देवी, 62 वर्षीय बदलूराम, 60 वर्षीय संजू देवी और 35 वर्षीय पार्वती देवी। पार्वती अपनी ससुराल से मायके आई थीं। अगले दिन पिता के साथ एक धार्मिक कार्यक्रम में जाने की तैयारी थी। किसे पता था कि यह उनकी आखिरी रात होगी।
एक घर, दो बेटे… और टूटा विश्वास
घटना के बाद घायल बड़े बेटे गुरुदेव ने छोटे भाई निरंकार पर हत्या का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जमीन बेचने से मिले पैसों को लेकर कहासुनी हुई थी। वह इसे रोज का विवाद समझकर कमरे में चला गया, लेकिन कुछ ही देर में चीखों ने सब कुछ बदल दिया।जब वह बाहर आया, तो मां-बाप, दादी और बहन खून से लथपथ पड़े थे। विरोध करने पर उस पर भी हमला हुआ। दोनों भाई घायल हुए—और उसी आंगन में रिश्तों की आखिरी सांसें टूटती चली गईं।
बहन की पुकार और उठते सवाल
दोपहर में मृतक की बेटी लक्ष्मी जब पोस्टमार्टम हाउस पहुंची, तो उसकी सिसकियों ने माहौल और भारी कर दिया। उसने छोटे भाई को निर्दोष बताया और बड़े भाई पर संपत्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
उसके शब्दों ने इस हत्याकांड को और उलझा दिया—क्या सच में यह जमीन और पैसों का विवाद था? या फिर किसी रिश्ते की दरार ने यह रूप ले लिया?
गांव का सन्नाटा
रामनगर में अब हर घर में एक ही चर्चा है—”कैसे हुआ यह सब?”पूर्व प्रधान का कहना है कि जमीन पहले ही बांटी जा चुकी थी। बाहर से यह परिवार सामान्य दिखता था। लेकिन शायद भीतर कहीं कोई दर्द पल रहा था, जो उस रात फट पड़ा।
इंतजार एक सच का
पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। छोटा बेटा गंभीर हालत में अस्पताल में है। उसके होश में आने का इंतजार है—शायद वही उस काली रात का सच बता पाए।लेकिन सच जो भी हो…उस आंगन में अब मां की आवाज नहीं गूंजेगी, दादी की दुआएं नहीं मिलेंगी, बहन की हंसी नहीं सुनाई देगी।एक ही रात में चार जनाजे उठे, और रामनगर की मिट्टी ने अपने चार अपनों को हमेशा के लिए अपने सीने में सुला लिया।
