लखनऊ । आजकल कम उम्र में बाल झड़ना, समय से पहले सफेद होना और दाढ़ी के बालों का पकना एक आम समस्या बनती जा रही है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, अनियमित खानपान और पाचन संबंधी दिक्कतें इन समस्याओं को और बढ़ा देती हैं। इसी विषय पर होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. दीक्षिता पांडे ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं।
तनाव और चिंता से झड़ते बाल
डॉ. पांडे के अनुसार यदि बाल अत्यधिक तनाव या मानसिक दबाव के कारण गिर रहे हैं, तो सबसे पहले जीवनशैली में सुधार जरूरी है।हरी सब्जियां, मौसमी फल, पर्याप्त पानी और संतुलित भोजन को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।होम्योपैथिक दृष्टिकोण से ऐसे मामलों में Arnica 30 लाभकारी मानी जाती है। नियमित और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इसका सेवन करने से फर्क महसूस किया जा सकता है।
गुच्छों में गिरते बाल
कई बार पुरुषों और महिलाओं दोनों में कंघी करते समय बाल गुच्छों में टूटकर गिरते हैं। यह शरीर में कमजोरी या पोषण की कमी का संकेत हो सकता है।ऐसी स्थिति में Phosphorus 30 लेने की सलाह दी जाती है। डॉ. पांडे बताती हैं कि लगातार तीन महीने तक, निर्धारित मात्रा में सेवन करने पर परिणाम दिखाई दे सकते हैं।
पेट की गड़बड़ी और बालों की समस्या
पाचन तंत्र कमजोर होने पर भी बालों की जड़ें प्रभावित होती हैं। गैस, अपच या लंबे समय तक पेट की खराबी बाल झड़ने का कारण बन सकती है।ऐसे मामलों में Arnica 30 के साथ Carbo-Veg 30 लेने की सलाह दी जाती है। सामान्यतः चार-चार गोली, चार-चार घंटे के अंतराल पर, लगभग तीन महीने तक लेने से लाभ मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, किसी भी दवा का सेवन चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही करना चाहिए।
पुरुषों में समय से पहले सफेद दाढ़ी और बाल
कम उम्र में दाढ़ी का सफेद होना या कानों के ऊपर दोनों ओर बालों का पकना कई पुरुषों के लिए चिंता का विषय बन रहा है।
डॉ. पांडे के अनुसार ऐसे मामलों में:
Lycopodium 30
Phosphoric Acid 30
Natrum Mur 30
इन तीनों दवाओं को एक साथ मिलाकर नियमित रूप से तीन महीने तक लेने से सकारात्मक परिणाम देखे जा सकते हैं।
जीवनशैली भी है अहम
डॉ. पांडे का कहना है कि केवल दवाइयों से ही समाधान संभव नहीं है। सही समय पर भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव से दूरी — ये सभी कारक बालों की सेहत पर सीधा असर डालते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हमारी दिनचर्या का सबसे ज्यादा प्रभाव दो चीजों पर दिखता है:
बालों की गुणवत्ता
चेहरे की रंगत
इसलिए खुश रहना, सकारात्मक सोचना और मानसिक तनाव को कम करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों की सलाह
हालांकि होम्योपैथिक दवाएं प्राकृतिक और सुरक्षित मानी जाती हैं, फिर भी किसी भी प्रकार की दवा शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य है। हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए दवा की मात्रा और अवधि भी अलग हो सकती है।यदि आप त्वचा, मुंहासे या अन्य स्वास्थ्य विषयों पर भी जानकारी चाहते हैं, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।स्वस्थ जीवनशैली अपनाइए, संतुलित आहार लीजिए और तनाव से दूर रहकर अपने बालों और सेहत का ध्यान रखिए।
