लखनऊ।] शहीद-ए-आजम भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर के बलिदान दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश भर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर व्यापक संकल्प सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं में बिजली कर्मियों ने निजीकरण के खिलाफ संघर्ष को तेज करने का ऐलान किया।
शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ मुखर होने का आह्वान
राजधानी लखनऊ में आयोजित केंद्रीय सभा को संबोधित करते हुए शैलेन्द्र दुबे ने भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची क्रांति का उद्देश्य पूंजीवाद, वर्गवाद और विशेषाधिकारवादी व्यवस्था का अंत कर एक समानतामूलक समाज की स्थापना करना है। उन्होंने कहा कि जब तक मजदूरों, किसानों और वंचित वर्गों को सत्ता में वास्तविक भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है।उन्होंने बिजली कर्मियों से अन्याय, शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ मुखर होने का आह्वान करते हुए कहा, “जहां अन्याय के खिलाफ आवाज उठती है, वहीं भगत सिंह जीवित होते हैं।”
निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश का निर्माण केवल बड़ी परियोजनाओं से नहीं, बल्कि मेहनतकश लोगों के संघर्ष और त्याग से होता है।सभा में यह संकल्प लिया गया कि जनता के धन से खड़े किए गए सार्वजनिक क्षेत्र के पावर सेक्टर को किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा। वक्ताओं ने इसे आम जनता के अधिकारों और देश की आर्थिक संप्रभुता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।कार्यक्रम में जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी.के. दीक्षित, सुहेल आबिद, छोटे लाल दीक्षित, श्री चन्द, दीपक चक्रवर्ती, सनाउल्लाह, मोहम्मद इलियास, प्रेम नाथ राय और सरजू त्रिवेदी सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
निजीकरण के खिलाफ आंदोलन को तेज
प्रदेशभर में आयोजित सभाओं में बिजली कर्मियों ने एकजुट होकर निजीकरण के खिलाफ आंदोलन को तेज करने, उत्पीड़न का विरोध करने और जनहित में सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण की दिशा में कदम आगे बढ़ाया, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
